उत्तराखंड- सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट पहुंचे दो IPS अधिकारी मांगी अंतरिम राहत, जानिये मामला
देहरादून - उत्तराखंड में आईजी पद पर कार्यरत अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीआईजी रैंक में भेजे जाने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। इस मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अंतरिम राहत की मांग की है। याचिका रजिस्टर्ड हो चुकी है और मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में होने की संभावना है।
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 5 मार्च को उत्तराखंड कैडर के तीन आईपीएस अधिकारियों अरुण मोहन जोशी, नीरू गर्ग और मुख्तार मोहसिन के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति आदेश जारी किए थे। इसके तहत वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर तैनात किया गया, जबकि वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में डीआईजी पद दिया गया। इसी बैच के आईपीएस अधिकारी मुख्तार मोहसिन को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में डीआईजी स्तर पर तैनाती दी गई।
इन आदेशों के बाद राज्य सरकार ने 6 मार्च को अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग को तत्काल प्रभाव से रिलीव भी कर दिया था। हालांकि मुख्तार मोहसिन को फिलहाल तकनीकी कारणों से रिलीव नहीं किया गया है, क्योंकि जिस पद पर उनकी तैनाती की गई है वह पद अप्रैल तक खाली नहीं बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि तीनों अधिकारी वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में आईजी पद पर पदोन्नत हो चुके हैं, जबकि केंद्र में उन्हें डीआईजी स्तर के पद पर तैनाती दी गई है। ऐसे में आईजी रैंक के अधिकारी का डीआईजी पद पर काम करना सवालों के घेरे में आ गया है।
बताया जा रहा है कि इस बार इन अधिकारियों ने स्वयं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया था, बल्कि राज्य सरकार ने ही 16 फरवरी 2026 को इन तीनों अधिकारियों के नाम गृह मंत्रालय को भेजे थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने विभागवार उनकी तैनाती तय कर दी।
इसी क्रम में अब अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अंतरिम राहत की मांग की है। माना जा रहा है कि कोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।