हल्द्वानी - सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में बच्चा बदलने के लगे आरोप में मचा हंगामा, परिजन बोले DNA टेस्ट करो, जानिए मामला 

 

हल्द्वानी - सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए प्रसूता के परिजनों ने हंगामा किया। मामला आशा कार्यकर्ता द्वारा दी गई गलत सूचना से जुड़ा बताया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि प्रसूता ने लड़के को जन्म दिया था, लेकिन बाद में उन्हें लड़की सौंप दी गई। उन्होंने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग भी उठाई।

रुद्रपुर के रम्पुरा निवासी सर्वेश कुमार की पत्नी को शनिवार रात करीब 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात लगभग 2:30 बजे महिला की बेड पर ही सामान्य प्रसव प्रक्रिया से डिलीवरी हुई। महिला के जेठ योगेश कुमार ने बताया कि जिस बेड पर प्रसव हुआ, उसी के पास मौजूद मुक्तेश्वर निवासी आशा कार्यकर्ता ने उन्हें लड़का पैदा होने की जानकारी दी थी। उस समय उनकी पत्नी भी मौके पर मौजूद थी।

परिजनों का कहना है कि इसी दौरान अस्पताल की एक महिला सफाई कर्मचारी ने कपड़े लाने के लिए उनकी पत्नी को बाहर भेज दिया। जब वह वापस लौटी तो कथित तौर पर वहां लड़के के बजाय लड़की रखी हुई थी, जिससे परिजनों को शक हुआ और उन्होंने बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. महिमा मौर्या ने बताया कि अस्पताल में नवजातों की पहचान के लिए लड़के को नीला और लड़की को गुलाबी टैग लगाया जाता है। शनिवार रात हुई सात डिलीवरी में से केवल एक ही लड़का पैदा हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ता की ओर से गलत जानकारी दी गई, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। जिस परिवार में लड़का पैदा हुआ था, उनकी ओर से बनाया गया वीडियो भी परिजनों को दिखाया गया।

मुख्य चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि प्रसूता के परिजनों से बातचीत कर मामला शांत कराया गया है। इस संबंध में न तो कोई लिखित और न ही मौखिक शिकायत अस्पताल प्रशासन को दी गई है। उन्होंने कहा कि भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है और ऐसे मामलों में आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नवजातों की अदला-बदली का कोई मामला नहीं है और पूरा विवाद गलत सूचना के कारण पैदा हुआ।