पौड़ी - जिलाधिकारी की एकतरफा कार्रवाई से राज्य के अभियंताओं में आक्रोश, आज से इंजीनियर्स फेडरेशन का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
देहरादून/श्रीनगर - पौड़ी गढ़वाल की जिलाधिकारी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की आड़ में राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोक निर्माण विभाग श्रीनगर के अधिशासी अभियंता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की घटना ने राज्य के अभियंता वर्ग में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। इसके विरोध में उत्तराखण्ड इंजीनियर्स फेडरेशन ने आज एक आपातकालीन ऑनलाइन बैठक आयोजित कर प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। बैठक में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, यूपीसीएल, लघु सिंचाई, ग्रामीण निर्माण विभाग, पिटकुल और यूजेवीएनएल जैसे विभागों के अभियंता संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मामला क्या है -
दिनांक 11 सितम्बर 2025 को भारी वर्षा के चलते श्रीनगर-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा (लगभग 40-45 मीटर) ध्वस्त हो गया था। भू-स्खलन के चलते यह मार्ग बंद हो गया था। ऐसे विकट हालातों में अधिशासी अभियंता द्वारा पोकलैंड मशीनों के माध्यम से त्वरित कटान कर मार्ग को अस्थायी रूप से खोल दिया गया।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, वैली साइड पर अलकनंदा नदी के कटाव से हुआ भू-धंसाव एक गंभीर इंजीनियरिंग चुनौती है, जिसे बिना विस्तृत DPR और तकनीकी परीक्षण के अस्थायी उपचार करना जनहानि का खतरा उत्पन्न कर सकता है। इसके बावजूद, जिलाधिकारी द्वारा अभियंता पर प्राथमिकी दर्ज कराना, अभियंताओं के अनुसार, न केवल "हठधर्मी" कदम है, बल्कि यह प्रशासनिक दमन का प्रतीक है।
फेडरेशन की मांगें और अगला कदम -
प्रांतीय महासचिव जितेन्द्र सिंह देव के अनुसार, बैठक में सर्वसम्मति से निम्नलिखित निर्णय लिए गए, उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी पौड़ी द्वारा दर्ज प्राथमिकी को तत्काल निरस्त किया जाए। जिलाधिकारी की "हठधर्मिता पूर्ण कार्रवाई" के लिए उनके खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई की जाए। यदि जांच में जिलाधिकारी की गलती पाई जाती है और उनके आदेश से आपदा राहत कार्य प्रभावित होते हैं, तो उन्हीं पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। भविष्य में जिलाधिकारी जैसे जिम्मेदार पदों पर जमीनी हकीकत समझने वाले और समन्वयक अधिकारी ही नियुक्त किए जाएं।
आज 15 सितम्बर 2025 से प्रदेश के सभी अभियंता काली पट्टी पहनकर कार्य करेंगे और जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजेंगे। 16 सितम्बर 2025: जनप्रतिनिधियों (विधायक/सांसद) के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि उक्त मांगें नहीं मानी जातीं, तो 17 सितम्बर को फेडरेशन की बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। फेडरेशन का कहना है कि आपदा जैसी संवेदनशील परिस्थिति में अभियंताओं को दबाव में लेकर निर्णय थोपना उचित नहीं है। इससे न केवल मनोबल गिरता है, बल्कि राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और राहत कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।