हल्द्वानी - अग्निवीर योजना रद्द कर सेना में नियमित भर्ती बहाल करे केंद्र सरकार, दो साल के एक्सटेंशन पर बोले यशपाल आर्य
 

दो साल का एक्सटेंशन युवाओं की चिंता का समाधान नहीं, स्थायी सेवा और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करे सरकार
 
 

हल्द्वानी - नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अग्निवीर योजना को देश की सुरक्षा, सेना के गौरव और करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार से इसे तत्काल रद्द करने तथा सेना में नियमित सैनिक भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार युवाओं की चिंताओं का समाधान नहीं है। देश की रक्षा करने वाले जवानों को स्थायी सेवा और सम्मानजनक भविष्य मिलना चाहिए।

यशपाल आर्य ने कहा कि चार साल पहले केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना लागू कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी लगातार इस योजना का विरोध करती रही है। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि देश की सेना कोई प्रयोगशाला नहीं है और राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीतिक प्रयोगों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना के पहले बैच के जवानों का चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। ऐसे में 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा से बाहर किए जाने का सवाल खड़ा हो रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से दो वर्ष के अतिरिक्त सेवा विस्तार की बात सामने आई है। आर्य ने कहा कि चार नवंबर को सीडीएस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आए इस फैसले ने योजना की खामियों और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बताया जा रहा है कि छह वर्ष की सेवा के बाद चयन मानदंडों पर खरे उतरने वाले जवानों को स्थायी किया जाएगा और बाकी को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि चार साल की सेवा के बाद दो साल का एक्सटेंशन क्यों दिया जा रहा है? जवानों को सीधे स्थायी नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही? देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि जिस योजना को केंद्र सरकार ने सेना के लिए ऐतिहासिक सुधार बताया था, आज उसमें बदलाव की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि योजना लागू करने से पहले देश की सुरक्षा, सेना के मनोबल और युवाओं के भविष्य का गंभीरता से आकलन किया गया था या नहीं।

आर्य ने अग्निवीरों की आत्महत्या के 40 से अधिक मामलों की खबरों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सेवा की शर्तों, भेदभाव और भविष्य की अनिश्चितता से जुड़ी चिंताएं गंभीर हैं। ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जिन्होंने अपने बच्चों को देश की सेवा के लिए भेजा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां पूरे देश के लिए चिंताजनक हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद सेना में नियमित जवानों की कमी का मुद्दा और गंभीर हुआ है। लगभग सवा दो लाख जवानों की कमी का सवाल लगातार उठाया जा रहा है। वहीं, करीब डेढ़ लाख ऐसे युवा, जो सेना और वायुसेना में भर्ती होकर ज्वाइनिंग का इंतजार कर रहे थे, उनके सपनों को भी इस फैसले से गहरी चोट पहुंची है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इन युवाओं ने वर्षों तक मेहनत की, शारीरिक और लिखित परीक्षाओं में सफलता हासिल की और देश की सेवा करने का सपना देखा। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि देश की सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है?

आर्य ने अग्निपथ योजना लागू करने के समय तीनों सेनाओं के प्रमुखों की भूमिका और उनकी सलाह को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक चर्चाओं में यह बात सामने आई थी कि सेना के प्रमुखों ने इस योजना को लाने की पहल नहीं की थी। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी महत्वपूर्ण योजना लागू करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया।

उन्होंने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अग्निवीर योजना के खिलाफ देशव्यापी 'जय जवान कैंपेन' चलाकर युवाओं की आवाज उठाई है। कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि अग्निपथ योजना समाप्त कर सेना में नियमित भर्ती व्यवस्था बहाल की जाए।

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से अग्निपथ योजना तत्काल रद्द करने, नियमित सैनिक भर्ती बहाल करने, अग्निवीरों को स्थायी सेवा और समान अधिकार देने, भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित युवाओं को न्याय दिलाने तथा सेना में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से भरने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने जवानों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आत्महत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को उचित सहायता देने की भी मांग उठाई।

यशपाल आर्य ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि मजबूत मनोबल, अनुभवी सैनिकों और सेना के प्रति अटूट विश्वास से सुनिश्चित होती है। जो जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है, उसके अपने भविष्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है। युवाओं को आधे-अधूरे समाधान के बजाय स्थायी भविष्य और सम्मानजनक सेवा मिलनी चाहिए।