नैनीताल - 22 हजार उपनल कर्मियों के मामले में नया मोड़, सरकार ने वापस लिया शपथपत्र, जानिए कब होगी अगली सुनवाई

 

नैनीताल - उत्तराखंड के करीब 22 हजार उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नया अपडेट सामने आया है। उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल किया गया शपथपत्र वापस ले लिया है। सरकार ने नया शपथपत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि पूर्व में दाखिल किया गया शपथपत्र वापस लिया जा रहा है, क्योंकि वह अभी कोर्ट के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हुआ था। सरकार ने नया शपथपत्र दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। मामले की अगली सुनवाई अब 10 सितंबर को होगी। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई के दौरान तीन सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हुए वर्चुअली पेश - 
सुनवाई के दौरान भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअली कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का अध्ययन करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब अगली सुनवाई में सचिव कार्मिक एवं सतर्कता शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर और सचिव सैनिक कल्याण बोर्ड युगल पंत को कोर्ट में उपस्थित होना होगा।

अनुबंध भराए जाने पर कर्मचारियों ने जताई आपत्ति - 
उपनल कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार की ओर से उपनल कर्मियों से नए अनुबंध भराए जा रहे हैं। संघ ने इसे अदालत के आदेशों के विपरीत बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

नियमितीकरण के फैसले पर टिकी नजरें - 
उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला लंबे समय से न्यायालय में चल रहा है। संघ की ओर से दाखिल अवमानना याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में आदेश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। संघ के अनुसार, वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी संविदा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया था। अब हाईकोर्ट में चल रही अवमानना कार्यवाही के बीच सरकार के रुख पर प्रदेश के करीब 22 हजार उपनल कर्मचारियों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।