उत्तराखंड - दो बड़े नशा तस्करों की 6.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी, प्लॉट, दुकानें सहित यह हैं शामिल
रुद्रपुर - उत्तराखंड के रुद्रपुर में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देशन में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में दो बड़े नशा तस्करों की लगभग ₹6.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहला मामला थाना पुलभट्टा क्षेत्र का है, जहां स्मैक तस्कर रिफाकत के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 1 जनवरी को पुलिस चेकिंग के दौरान रिफाकत ने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से 1060 ग्राम स्मैक, एक 315 बोर तमंचा और कारतूस बरामद किए गए थे।
जांच में सामने आया कि रिफाकत लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है और उसके खिलाफ हत्या, तस्करी और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 18 मुकदमे दर्ज हैं। आर्थिक जांच में उसके नाम पर करीब ₹3.70 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ। इन संपत्तियों को कुर्क करने के लिए 19 मार्च को सक्षम प्राधिकरण, नई दिल्ली में प्रक्रिया शुरू की गई।
दूसरा मामला गांजा तस्करी के बड़े सरगना संजय गुप्ता से जुड़ा है। 11 अप्रैल 2025 को पुलभट्टा पुलिस ने एक वाहन से 434.748 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। जांच में संजय गुप्ता का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। वह अन्य राज्यों से गांजा लाकर उत्तराखंड में सप्लाई करता था और वाहनों को दूसरों के नाम पर चलाता था। जांच में पता चला कि उसने अवैध तस्करी से लगभग ₹3 करोड़ की संपत्ति अर्जित की है, जिसमें प्लॉट, दुकानें, मकान और वाहन शामिल हैं। पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत इन संपत्तियों के जब्तीकरण के लिए 19 मार्च को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध से अर्जित संपत्ति को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि नशा तस्करी या किसी भी आपराधिक गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह कार्रवाई नशा तस्करों के लिए कड़ा संदेश है कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति अब सुरक्षित नहीं है और कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।