हल्द्वानी - साइबर ठगों के झांसे में आयीं दो महिलाएं, एक से 15.47 लाख की ठगी, तो दूसरी से उड़ाए इतने रुपये
हल्द्वानी - शहर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में महिलाओं से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब और फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए साइबर ठगों ने वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पार्ट टाइम जॉब के नाम पर 15.47 लाख की ठगी -
निलियम कॉलोनी निवासी 33 वर्षीय महिला ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि 31 मई को फेसबुक के माध्यम से उन्हें पार्ट टाइम ऑनलाइन जॉब का लिंक मिला। लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया, जहां फाइव स्टार रेस्टोरेंट को रेटिंग देने और ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले अच्छी कमाई का लालच दिया गया।
एक जून को उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को सरकारी प्रमाणित संस्था से जुड़ा बताकर ठगों ने विश्वास जीत लिया। इसके बाद एक वेबसाइट पर ट्रेडिंग से जुड़े टास्क पूरे करने को कहा गया। टास्क पूरा करने और कथित त्रुटियां हटाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में आईएमपीएस, क्विक पे और पेटीएम के जरिए रकम जमा कराई गई।
ठग लगातार भरोसा दिलाते रहे कि जमा धनराशि सुरक्षित है और टास्क पूरा होने पर अधिक लाभ के साथ वापस कर दी जाएगी। महिला ने एक जून से तीन जून के बीच कुल 15,47,776 रुपये विभिन्न खातों में जमा कर दिए। जब उन्होंने रकम वापस मांगी तो और पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया। ठगी का एहसास होने पर पीड़िता ने कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फर्जी कस्टमर केयर नंबर से 98 हजार पार -
दूसरे मामले में मुखानी के आदर्श नगर निवासी नूतन पांडे ने छह मई को ब्लिंकिट से घरेलू सामान ऑर्डर किया था। ऑर्डर में तकनीकी समस्या आने पर उन्होंने 16 मई को गूगल पर कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजा। मिले नंबर पर कॉल करने पर कॉलर ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताया और ऑर्डर से जुड़ी जानकारी ली।
इसके बाद ऑर्डर वाले नंबर पर पीडीएफ के नाम से एक फाइल भेजी गई, जो असल में एपीके फाइल थी। पीडीएफ समझकर क्लिक करते ही कुछ सेकंड में उनके आईसीआईसीआई बैंक खाते से 65,210 रुपये और एक्सिस बैंक खाते से 33,000 रुपये कट गए। पीड़िता ने तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। रुद्रपुर साइबर थाने से जांच के बाद मामला मुखानी कोतवाली ट्रांसफर किया गया, जहां एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
एपीके फाइल से मिल जाता है मोबाइल का एक्सेस -
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि कई लोग मोबाइल सेटिंग की जानकारी के अभाव में अनजान फाइलों को इंस्टॉल करने की अनुमति दे देते हैं। एपीके फाइल पर क्लिक करते ही साइबर अपराधियों को मोबाइल का एक्सेस मिल सकता है। ऐसे में अनजान फाइलों को इंस्टॉल करने से बचें और व्हाट्सएप में ऑटोमैटिक डाउनलोड का विकल्प बंद रखें।
सीओ साइबर अमित कुमार ने लोगों से अपील की है कि—
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करें।
ऑनलाइन नौकरी और निवेश के आकर्षक प्रस्तावों से सतर्क रहें।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें और एपीके फाइल डाउनलोड करने से बचें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल कर राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने लोगों से जागरूक रहने और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है।