लालकुआं - बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग पर बड़ा जन-आंदोलन, हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोग
लालकुआं - बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की दशकों पुरानी मांग अब एक प्रचंड जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। आज क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने ‘जनता इंटर कॉलेज’ के मैदान में शक्ति प्रदर्शन किया। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों के अंतहीन काफिले के साथ पहुंचे ग्रामीणों के कारण पूरा क्षेत्र “राजस्व गांव” के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों का जोश इतना ज़बरदस्त था कि कॉलेज का विशाल परिसर भी छोटा पड़ गया। भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आने से मैदान खचाखच भर गया और सड़कों पर लगातार लोगों का हुजूम नजर आया। लालकुआं की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गए।
प्रशासन मुस्तैद, एम्बुलेंस को रास्ता बनाया -
भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि जाम में एक एम्बुलेंस फंस गई। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ के बीच रास्ता बनाया और एम्बुलेंस को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने विषम परिस्थितियों के बावजूद यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया।
अनुशासन और रणनीति से जीतेंगे हक की जंग -
जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी जाति या धर्म की नहीं, बल्कि अस्तित्व की है। उन्होंने कहा, “हम अनुशासन के दायरे में रहकर अपना एजेंडा और रणनीति तैयार करेंगे। बिंदुखत्ता के लोग अब जाग चुके हैं और इसे राजस्व गांव घोषित करवाकर ही दम लेंगे।” वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जनता ही असली मालिक है और शासन तंत्र उनकी सेवा के लिए है।
बाहरी नेताओं के हस्तक्षेप पर नाराजगी -
आंदोलन के बीच एक नया विवाद भी सामने आया। कई स्थानीय ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने मंच पर बाहरी नेताओं की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह बिंदुखत्ता के आम नागरिकों का निष्पक्ष और स्वतःस्फूर्त आंदोलन है, जिसे बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप से भटकाया जा सकता है। ग्रामीणों का मानना है कि आंदोलन केवल बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित कराने तक सीमित रहना चाहिए और इसे राजनीतिक लाभ का साधन नहीं बनने देना चाहिए।