हल्द्वानी - केंद्र से मिली हरी झंडी, लेकिन इस कारण फंसा 13 किमी लंबा हल्द्वानी बाईपास प्राजेक्ट, इतनी पहुंची लागत
हल्द्वानी - बरेली रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित हल्दूचौड़–तीनपानी बाइपास परियोजना बजट की अनिश्चितता के चलते आगे नहीं बढ़ पा रही है। केंद्र सरकार से वनभूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बावजूद शासन स्तर पर वित्तीय मंजूरी नहीं मिल सकी है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) द्वारा वर्ष 2023 में तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 27 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब बढ़कर 32 करोड़ रुपये हो गई है। 13 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण से बरेली और लखनऊ से आने वाले पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद थी।
बरेली रोड पर ट्रकों, डंपरों, बसों और पर्यटक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाईवे चौड़ीकरण के बाद वाहनों की रफ्तार तेज होने से तीनपानी से हल्दूचौड़ के बीच जाम और दुर्घटनाओं की घटनाएं आम हो गई हैं। घनी आबादी और छोटे-छोटे बाजारों के कारण स्थिति और गंभीर बनी रहती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्तावित बाइपास हल्दूचौड़ स्थित ऑयल डिपो के पास से जंगल किनारे होते हुए अंदरूनी क्षेत्र से गुजरता हुआ तीनपानी के पास रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ेगा। परियोजना के तहत साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाना है।
प्रथम चरण में 57 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। वर्ष 2024 में केंद्रीय वन मंत्रालय ने 13 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए 26 हेक्टेयर भूमि भी चिह्नित कर ली गई है।
हालांकि, बढ़ी हुई लागत के चलते बजट की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसी कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार ने बताया कि हल्दूचौड़ से तीनपानी तक बाइपास निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की डीपीआर शासन को भेज दी गई है और जल्द वित्तीय स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
नैनीताल और कालाढूंगी रोड अब यूयूएसडीए के अधीन -
उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (यूयूएसडीए) द्वारा कालाढूंगी रोड पर कालूसिद्ध मंदिर से कठघरिया तक तथा नैनीताल रोड पर तीनपानी से नरीमन चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण और सुंदरीकरण का कार्य किया जा रहा है। ये दोनों सड़कें पूर्व में लोनिवि के अधीन थीं।
ईई प्रत्यूष कुमार ने बताया कि शहर की दोनों प्रमुख सड़कें अब यूयूएसडीए को हस्तांतरित कर दी गई हैं। निर्माण कार्य से लेकर दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) तक इन सड़कों का रखरखाव यूयूएसडीए द्वारा किया जाएगा।