लालकुआं - हंगामा, प्रॉपर्टी डीलर की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, सुसाइड नोट में महिला पटवारी का नाम, पटवारी गिरफ्तार 

 

लालकुआं (नैनीताल) -  लालकुआं क्षेत्र के समाजसेवी एवं प्रॉपर्टी डीलर महेश जोशी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद इलाके में आक्रोश की लहर दौड़ गई। मृतक के सुसाइड नोट में राजस्व विभाग की महिला पटवारी पूजा रानी का नाम सामने आने के बाद ग्रामीणों ने सोमवार को कोतवाली के बाहर शव रखकर जबरदस्त प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए।

तेज हुई आंदोलन की आग, 4 घंटे तक अड़े रहे ग्रामीण - 
बरेली के राममूर्ति अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को महेश जोशी का निधन हो गया था। शाम लगभग 5 बजे उनका शव जब लालकुआं पहुंचा, तो कोतवाली के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे स्थानीय निवासियों ने पटवारी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम कर दी। धरनास्थल पर कनिष्ठ प्रमुख कमल भंडारी, ग्राम प्रधान रुक्मणी नेगी सहित कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रशासन के प्रयास असफल, फिर हुआ वीडियो कॉल से हल - 
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, एसडीएम लालकुआं, पुलिस क्षेत्राधिकारी और विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने प्रदर्शनकारियों से कई दौर की बातचीत की, लेकिन ग्रामीण पटवारी की गिरफ्तारी के बिना हटने को तैयार नहीं हुए। अंततः पुलिस ने मृतक के सुसाइड नोट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया और रामनगर पुलिस द्वारा पटवारी पूजा रानी की गिरफ्तारी की गई। ग्रामीणों को वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी का दृश्य दिखाया गया, तब जाकर वे धरनास्थल से हटे और शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए।

क्या है मामला?
20 सितंबर को महेश जोशी ने तहसील परिसर में कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया था। अर्ध बेहोशी की हालत में उन्हें वाहन के पास पाया गया और इलाज के लिए हल्द्वानी व फिर बरेली रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, उनकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला जिसमें कुछ राजस्व विभाग कर्मचारियों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

प्रशासनिक लापरवाही पर भी उठे सवाल - 
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी घटना तहसील परिसर में हुई और किसी को भनक तक नहीं लगी। प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

क्षेत्र में शोक की लहर - 
54 वर्षीय महेश जोशी क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर के साथ-साथ समाजसेवी कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उनके निधन से बबूर गुमटी सहित पूरे लालकुआं क्षेत्र में शोक की लहर है। वे अपने पीछे दो पुत्र और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।