हल्द्वानी - उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में क्षमता वर्धन कार्यशाला का आयोजन, जानिए क्यों अहम है यह वर्कशॉप
हल्द्वानी - उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के क्षेत्रीय सेवा निदेशालय द्वारा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार, दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने तथा अध्ययन केन्द्रों के सुचारु संचालन के उद्देश्य से मुख्यालय में “क्षमता वर्धन कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा एवं कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय सेवा निदेशालय की निदेशक प्रो. गिरिजा पाण्डेय ने नई शिक्षा नीति, “अर्न व्हाइल यू लर्न” योजना तथा मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा व्यवस्था में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभानी है। उन्होंने इस कार्यशाला को केवल शैक्षणिक सुदृढ़ीकरण ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के सामाजिक एवं शैक्षिक विकास की महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने डिजिटल शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य मुक्त विश्वविद्यालयों में इग्नू के बाद सबसे अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में लगातार नामांकन वृद्धि हो रही है तथा 12 MOOCs पाठ्यक्रमों में लगभग 70 हजार शिक्षार्थियों ने पंजीकरण किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 61 देशों के विद्यार्थियों की सहभागिता, प्रस्तावित शैक्षणिक समझौतों तथा नए पाठ्यक्रमों की जानकारी भी साझा की। कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त निदेशक प्रो. एम. एम. जोशी ने किया।
द्वितीय सत्र में विभिन्न अनुभागों की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान प्रवेश प्रक्रिया, शुल्क जमा प्रणाली, अध्ययन सामग्री वितरण, परीक्षा प्रणाली, क्षेत्रीय केन्द्रों की भूमिका तथा विश्वविद्यालय की ऑनलाइन सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में कुमाऊँ क्षेत्र के तीनों क्षेत्रीय निदेशालयों से अध्ययन केन्द्र समन्वयकों, सहायक समन्वयकों सहित लगभग 48 अध्ययन केन्द्रों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान अध्ययन केन्द्रों को अधिक सशक्त, सक्रिय एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर विशेष बल दिया गया। अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर एवं सुझाव सत्र में प्रतिभागियों ने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सुधारों से संबंधित सुझाव प्रस्तुत किए।