Kumaon News - पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने ली तीन जानें, गर्भवती मां और दो जुड़वा बच्चों की हुई मौत 
 

 

रामनगर/ हल्द्वानी/ काशीपुर - पहाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अल्मोड़ा जिले के इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती निशा और उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार निशा को इलाज के लिए तीन दिनों तक रामनगर से हल्द्वानी और फिर काशीपुर के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिल सका।

परिजनों के मुताबिक 30 अगस्त की रात निशा को अचानक घुटन और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। कुछ देर बाद हालत में सुधार होने पर परिवार ने इसे सामान्य समझा। अगले दिन सुबह सांस लेने में परेशानी बढ़ी तो परिजन उसे रामनगर के रामदत्त जोशी राजकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने मामला जटिल बताते हुए उसे हल्द्वानी ले जाने की सलाह दी।

इसके बाद परिजन निशा को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि वहां निजी स्तर पर अल्ट्रासाउंड कराया गया। जांच के बाद निशा की हालत ठीक बताई गई और उसे घर ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजन उसे एक रिश्तेदार के घर ले गए।

रात में फिर बिगड़ी हालत - 
एक सितंबर की रात करीब नौ बजे निशा की हालत अचानक फिर बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर परिजन उसे दोबारा सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि केस को गंभीर और जटिल बताते हुए उसे भर्ती करने के बजाय आगे के उपचार के लिए रेफर कर दिया गया।

इसके बाद परिवार निशा को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन वहां भी उपचार नहीं हो सका। लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजन उसे काशीपुर ले गए। यहां भी परिवार को तीन अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े।

ऑपरेशन से पहले आई गंभीर स्थिति - 
दो सितंबर की सुबह करीब 10 बजे निशा को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जा रहा था। परिजनों के मुताबिक इसी दौरान उसे लगातार दो अटैक आए और उसकी मौत हो गई। इसके बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर उसके गर्भ से जुड़वा बच्चों को बाहर निकाला।

परिजनों के अनुसार दोनों बच्चों में से एक की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरे ने भी जन्म के कुछ घंटे बाद दम तोड़ दिया। इस तरह तीन दिनों तक इलाज के लिए भटकने के बाद निशा और उसके दोनों नवजात बच्चों की जान नहीं बच सकी।

एक साल पहले हुई थी शादी -
परिजनों के मुताबिक निशा की शादी करीब एक वर्ष पहले मनोज से हुई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। इस घटना ने ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, समय पर रेफरल, गंभीर गर्भवती महिलाओं के उपचार और अस्पतालों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इलाज में लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।