उत्तराखंड - बिजली की डिमांड बढ़ेगी तो लगेंगे विद्युत कटौती के झटके, झेलने को रहें तैयार आड़े आ रही है यह दिक्कत 

 

उत्तराखंड - गर्मी के मौसम के साथ उत्तराखंड में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने लगी है, जिससे ऊर्जा विभाग की चुनौतियाँ भी बढ़ गई हैं। जून माह में राज्य की प्रतिदिन बिजली मांग लगभग 6.1 करोड़ यूनिट तक पहुँच गई है, जबकि राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता केवल करीब 1.8 करोड़ यूनिट प्रतिदिन ही है। इस अंतर ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।

राज्य अपनी कुल मांग का बड़ा हिस्सा स्वयं पूरा करने में असमर्थ है और लगभग 60 प्रतिशत बिजली के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। केंद्रीय पूल से लगभग 2 करोड़ यूनिट प्रतिदिन बिजली मिलने के बावजूद कुल उपलब्धता लगभग 3.8 करोड़ यूनिट ही हो पा रही है, जो मांग से काफी कम है।

इस कमी को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसका सीधा असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली खरीद पर लगभग 9,407 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।

बढ़ती मांग को नियंत्रित करने के लिए विभाग ने औद्योगिक क्षेत्रों में प्रबंधन के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में स्टील फर्नेस उद्योगों को एक घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अस्थायी है, लेकिन यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही तो और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।

ऊर्जा विभाग के अनुसार राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई जल विद्युत परियोजनाओं और सौर ऊर्जा योजनाओं पर काम चल रहा है। साथ ही बिजली चोरी रोकने के प्रयासों से वितरण हानियों में कुछ कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों, औद्योगिक निवेश और बढ़ती घरेलू खपत के कारण बिजली की मांग और तेज़ी से बढ़ेगी। ऐसे में केवल बाजार से बिजली खरीदकर स्थिति संभालना दीर्घकालिक समाधान नहीं होगा। राज्य को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से विकसित करने की दिशा में ठोस रणनीति अपनानी होगी।

 

प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नए सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं और निजी निवेश को आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बिजली चोरी रोकने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में बिजली चोरी की घटनाओं में कमी आई है, जिससे वितरण हानियों को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
— आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव (ऊर्जा)