उत्तराखंड - 20 हजार की गड़बड़ी पर SBI बैंक को देना पड़ा 1.49 लाख हर्जाना, उपभोक्ता ने तीन साल लड़ी कानूनी लड़ाई
उत्तराखंड - देहरादून के एक जागरूक उपभोक्ता ने बैंक के खिलाफ अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते हुए यह साबित कर दिया कि शिकायतों को नजरअंदाज करना बैंकों को भारी पड़ सकता है। डालनवाला निवासी गुरवंत सिंह ने मात्र 20 हजार रुपये की गड़बड़ी के मामले में तीन साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को करीब 1.49 लाख रुपये का हर्जाना भरने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, गुरवंत सिंह ने 23 फरवरी 2022 को एसबीआई के एक एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने के लिए कार्ड स्वाइप किया था, लेकिन मशीन से रुपये नहीं निकले और न ही किसी तरह का डेबिट एसएमएस आया। इसे तकनीकी गड़बड़ी समझकर वह एटीएम से वापस लौट गए। इसके बाद तीन और चार मार्च को उनके खाते से कुल 20 हजार रुपये डेबिट हो गए। उन्होंने तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन बैंक अधिकारियों ने लॉग रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि कैश निकल चुका है और बैंक इसमें कुछ नहीं कर सकता।
बैंक के इस रवैये से असंतुष्ट होकर गुरवंत सिंह ने दिसंबर 2022 में जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान आयोग ने बैंक से ट्रांजेक्शन सफल होने के ठोस सबूत मांगे, लेकिन बैंक यह साबित नहीं कर पाया कि नकदी वास्तव में उपभोक्ता को मिली थी।
अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह खरे और सदस्य अलका नेगी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि बैंक केवल अपनी आंतरिक मशीन रिपोर्ट के आधार पर उपभोक्ता के दावे को खारिज नहीं कर सकता। आयोग ने आरबीआई की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के सात कार्य दिवसों के भीतर समाधान न होने पर बैंक को प्रतिदिन 100 रुपये का हर्जाना देना होगा।
चूंकि शिकायत चार मार्च 2022 को दर्ज हुई थी, सात दिन बाद 11 मार्च से लेकर पांच अगस्त 2025 (फैसले की तारीख) तक कुल 1243 दिन बीत चुके थे। इस अवधि के लिए बैंक पर 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 1,24,300 रुपये का विलंब शुल्क लगाया गया। साथ ही खाते से कटे 20 हजार रुपये लौटाने और मानसिक उत्पीड़न व कानूनी खर्च के लिए 5 हजार रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया गया। इस तरह कुल 1.49 लाख रुपये का हर्जाना निर्धारित किया गया।
जिला उपभोक्ता फोरम की सदस्य अलका नेगी ने कहा कि उपभोक्ताओं को बैंक में शिकायत करते समय उसकी रिसीविंग जरूर लेनी चाहिए। यदि बैंक समय पर समाधान नहीं करता तो उपभोक्ता आरबीआई के नियमों का हवाला देकर जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।