देहरादून - बेटों की हैवानियत से तंग विधवा मां ने लगाई DM से गुहार, डीएम की ऐसी सख्ती, जिंदगी भर याद करेंगे बिगड़ैल बेटे 
 

 

देहरादून — राजधानी देहरादून के भागीरथपुरम बंजारावाला क्षेत्र से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां दो जवान बेटे अपनी विधवा मां के लिए ही जीवन का सबसे बड़ा संकट बन गए हैं। नशे की लत और हिंसक व्यवहार के चलते मां की जान पर बन आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों बेटों के खिलाफ गुंडा अधिनियम 1970 के तहत त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
 
डीएम ने खुद लिया संज्ञान - 
22 अगस्त को जिला कार्यालय पहुंची पीड़ित मां विजयलक्ष्मी पंवार ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी दुखभरी आपबीती रखी। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बेटे — शुभम पंवार और एक अन्य — नशे के आदी हैं, और जब-तब उनसे पैसे मांगते हुए मारपीट करते हैं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि अब वे उन्हें झोपड़ी में ही जान से मारने की धमकी देने लगे हैं। डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए, बिना समय गंवाए उसी दिन गोपनीय जांच करवाई। जांच में पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पुष्टि की कि दोनों बेटे अपनी मां को नियमित रूप से प्रताड़ित करते हैं।

गुंडा एक्ट में त्वरित कार्रवाई, 26 अगस्त को कोर्ट में पेशी के आदेश - 
जिलाधिकारी ने गुंडा अधिनियम 1970 के तहत तत्काल प्रभाव से कार्रवाई प्रारंभ करते हुए दोनों बेटों को नोटिस जारी कर दिए हैं। उन्हें 26 अगस्त, 2025 को पूर्वाह्न 10:30 बजे डीएम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है। ऐसा न करने पर उनके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जिला बदर किया जा सकता है।

महिला सुरक्षा को सर्वोपरि मानकर हुआ ऐतिहासिक निर्णय - 
यह पहला मौका है जब देहरादून में डीएम द्वारा बिना थाना रिपोर्ट या कचहरी प्रक्रिया के, सीधे जन शिकायत पर गुंडा एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। डीएम ने स्पष्ट किया कि “जब स्वयं एक मां अपनी जान के लिए गुहार लगाए, तो प्रशासन को संवेदनशीलता और सख्ती दोनों दिखानी होती है। जटिल कानूनी प्रक्रियाएं सुरक्षा के आड़े नहीं आ सकतीं।”

जिला प्रशासन बना न्याय का मंदिर - 
इस मामले ने न सिर्फ प्रशासन की तत्परता का परिचय दिया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि जब आम जनता असहाय हो जाए, तो प्रशासन स्वयं एक संवेदनशील अभिभावक की भूमिका निभा सकता है। जिले में अब ऐसे मामलों पर फास्ट ट्रैक तरीके से सुनवाई और निर्णय की व्यवस्था बनाई जा रही है।