देहरादून - पीएम मोदी के आगमन से पहले जश्न पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने दागे सवाल, बोले इवेंट मैनेजमेंट से ऊब चुकी जनता 
 

 

देहरादून -  उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जश्न का माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन जनता के असली मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गृह मंत्री अमित शाह, फिर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखंड आ रहे हैं। “हम उनका स्वागत करते हैं, लेकिन जश्न के शोर में जनता के सवाल दबाए नहीं जा सकते। 

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर यह जश्न किस बात का है। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, पलायन, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। आर्य ने कहा कि महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार ने राहत के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।

युवाओं के रोजगार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं से त्रस्त है। सरकार बताए कि चार वर्षों में कितनी स्थायी नौकरियां दी गईं। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पताल डॉक्टरों, दवाओं और उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही संसाधन।

पलायन के मुद्दे पर आर्य ने कहा कि गांव खाली हो रहे हैं और पहाड़ वीरान होते जा रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पलायन रोकने के लिए उसकी क्या नीति है। कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि अपराध बढ़ रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भ्रष्टाचार के मामलों में भी सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।

इसके अलावा, आपदा प्रभावितों के पुनर्वास को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोग आज भी स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं और सरकार केवल घोषणाएं कर रही है। अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता अब “इवेंट मैनेजमेंट और विज्ञापन की राजनीति” से ऊब चुकी है। यदि सरकार के पास वास्तविक उपलब्धियां हैं तो उन्हें आंकड़ों के साथ सामने लाना चाहिए, अन्यथा यह जश्न जनता की भावनाओं के साथ मजाक है।