देहरादून - नेता प्रतिपक्ष आर्य ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, 21 दिनों तक बजट सत्र चलाने की मांग, सोमवार भी शामिल करने का आग्रह
देहरादून - उत्तराखंड में आगामी विधानसभा बजट सत्र को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधायक यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिवस तक तथा कम से कम तीन सोमवारों सहित आहूत किए जाने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार विधानसभा के माध्यम से जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। प्रश्नकाल और अन्य संसदीय प्रावधानों के तहत पक्ष-विपक्ष के विधायक राज्य और अपनी विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं। ऐसे में विधानसभा का पर्याप्त अवधि तक चलना जरूरी है।
उन्होंने उल्लेख किया कि वर्तमान पंचम विधानसभा (29 मार्च 2022 से प्रारंभ) में अब तक 9 सत्र आयोजित हुए हैं, जिनमें कुल 32 कार्य दिवस ही रहे हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन सत्रों में प्रश्नकाल सहित सोमवार का दिन निर्धारित नहीं किया गया, जबकि परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों के प्रश्नों के लिए सोमवार नियत होता है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री के अधीन लगभग 40 महत्वपूर्ण विभाग हैं, जिनमें गृह, पेयजल, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, शहरी विकास और संसदीय कार्य जैसे अहम विभाग शामिल हैं। सोमवार को प्रश्नकाल न होने के कारण कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, आपदा तैयारियों और पेयजल-बिजली आपूर्ति जैसे गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाई।
यशपाल आर्य ने कहा कि आगामी बजट सत्र में बजट भाषण, अनुदान मांगों पर चर्चा और वित्त विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कार्य होने हैं। ऐसे में जनहित के मुद्दों पर प्रभावी चर्चा और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सत्र की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि बजट सत्र कम से कम 21 दिन तथा तीन सोमवारों सहित आयोजित किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विधानसभा की कार्यवाही संचालित हो सके।
पत्र में सोमवार शामिल करने का आग्रह क्यों?
उत्तराखंड विधानसभा की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों के प्रश्नों का उत्तर सोमवार को लिया जाता है। यशपाल आर्य ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के अधीन लगभग 40 महत्वपूर्ण विभाग हैं जैसे गृह, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार उन्मूलन, शहरी विकास इन विभागों से जुड़े मुद्दों पर विधायकों को प्रश्नकाल के माध्यम से जवाब पाने का अधिकार है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अब तक आयोजित सत्रों में एक भी सोमवार प्रश्नकाल के लिए निर्धारित नहीं हुआ, जिससे विधायकों को इन विभागों के गंभीर मुद्दों पर सरकार से उत्तर प्राप्त नहीं हो पाए।
इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कम से कम तीन सोमवार सत्र में शामिल हों, ताकि मुख्यमंत्री और उनके विभागों से जुड़े सवालों पर खुलकर चर्चा हो और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। संक्षेप में, सोमवार इसलिए शामिल करने का आग्रह किया गया ताकि प्रश्नकाल आयोजित हो और मुख्यमंत्री व उनके विभागों की जवाबदेही बनी रहे।