देहरादून - धामी मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा आज संभव, सीएम का बोझ होगा कम, फेरबदल के संकेत

 

देहरादून - उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभागों के बंटवारे पर सभी की नजरें टिकी हैं। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को विभागों का आवंटन किया जा सकता है, जबकि मंत्रियों को सोमवार से कार्यभार संभालने के संकेत दे दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस बार विभागों का आवंटन केवल नए मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया जा सकता है। सरकार प्रशासनिक दक्षता और संतुलन को ध्यान में रखते हुए व्यापक पुनर्गठन की तैयारी में है।

हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री बनाया है। लंबे समय से रिक्त चल रहे पांच पदों को भरने के बाद अब विभागों के बंटवारे पर मंथन जारी है।

सीएम धामी के कंधों से कम होगा बोझ - 
वर्तमान में मुख्यमंत्री धामी के पास 35 से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है। पहले उनके पास करीब 25 विभाग थे, लेकिन मंत्री चंदन रामदास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद उनके सभी विभाग भी सीएम के पास आ गए। इसके चलते विभागों की संख्या लगातार बढ़ती गई। अब नए मंत्रियों को जिम्मेदारी मिलने के बाद इन विभागों का बंटवारा किया जाएगा, जिससे मुख्यमंत्री का कार्यभार कम होगा और शासन-प्रशासन के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। ऊर्जा समेत कई अहम विभाग फिलहाल सीएम के पास ही हैं, जिन्हें अब नए मंत्रियों को सौंपा जा सकता है।

सरकार का फोकस—तेज और प्रभावी कामकाज - 
सरकार का उद्देश्य है कि विभागों का बंटवारा इस तरह किया जाए जिससे योजनाओं का लाभ तेजी और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचे। नए मंत्री नई सोच और ऊर्जा के साथ काम करेंगे, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है।

चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी - 
नए मंत्रियों के पास खुद को साबित करने के लिए एक साल से भी कम समय है। ऐसे में विभाग मिलने के बाद उनके सामने बेहतर प्रदर्शन के साथ जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती होगी। यही कारण है कि विभागों के आवंटन को लेकर सरकार कोई जल्दबाजी नहीं कर रही और संतुलित निर्णय लेने पर जोर दे रही है। फिलहाल, विभागों के अंतिम बंटवारे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है और औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।