नैनीताल - हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद बीडी पांडे अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य सचिव, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
नैनीताल - उत्तराखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। बुधवार को स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे और अपर सचिव डॉ. सौरभ गहरवार ने नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने अस्पताल के विभिन्न विभागों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही मौके की वीडियोग्राफी भी कराई। स्वास्थ्य सचिव ने आपातकालीन कक्ष, ओपीडी, एक्सरे, सीटी स्कैन, प्रयोगशाला, पंजीकरण कक्ष और ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में साफ-सफाई और जांच सुविधाएं संतोषजनक पाई गईं। हालांकि, औषधि भंडार में मैनिटॉल दवा उपलब्ध नहीं मिली। इस पर स्वास्थ्य सचिव ने तत्काल आवश्यक दवाओं की खरीद के निर्देश दिए।
स्टाफ और भवन की समस्याएं सामने आईं -
निरीक्षण के दौरान अस्पताल कर्मियों ने अधिकारियों के सामने फार्मासिस्टों की कमी, भवन की जर्जर स्थिति, छत टपकने, स्टाफ नर्सों के लिए पर्याप्त आवास की व्यवस्था नहीं होने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी की समस्याएं रखीं। स्वास्थ्य सचिव ने कर्मचारियों की कमी को आउटसोर्स के माध्यम से दूर करने के निर्देश दिए। इसके अलावा आवश्यक छोटे उपकरण यूजर चार्ज फंड से खरीदने को कहा। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और जिलाधिकारी को अस्पताल में छोटे उपकरणों की कमी तीन से चार दिन के भीतर दूर करने के निर्देश दिए।
अस्पताल के आधारभूत ढांचे और अन्य कमियों का विस्तृत आकलन करने के लिए शासन स्तर से विशेषज्ञ समिति भेजने की भी बात कही गई। स्वास्थ्य सचिव के अनुसार, समिति दो दिन के भीतर अस्पताल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बीडी पांडे जिला अस्पताल नैनीताल ही नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सरकार की ओर से हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
तीन से चार माह में डॉक्टरों की कमी दूर करने का दावा -
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे ने प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में डॉक्टरों के 2,909 स्वीकृत पद हैं, जबकि वर्तमान में करीब 2,550 चिकित्सक कार्यरत हैं। हाल ही में मेडिकल बोर्ड के माध्यम से 252 नए डॉक्टरों का चयन किया गया है, जिनमें लगभग 200 चिकित्सक कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी अब घटकर करीब 400 से 450 पदों तक रह गई है। मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक और प्रोफेसर के 422 पदों पर चयन प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। जरूरत के अनुसार बाहरी माध्यमों से भी चिकित्सकों की नियुक्ति की जा रही है। वहीं, सेवानिवृत्त चिकित्सकों को भी पांच वर्ष तक सेवाएं देने का अवसर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के तहत तैयार की गई रणनीति के परिणाम अगले तीन से चार माह में दिखाई देने लगेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अवधि में प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा।