हल्द्वानी - EVCL क्रिकेट धोखाधड़ी मामले में विकास ढाका को ACJM कोर्ट से जमानत, कोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया नियमविरुद्ध
नैनीताल/हल्द्वानी - हल्द्वानी में क्रिकेट मैच की आड़ में कथित धोखाधड़ी के आरोपी एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग (EVCL) के आयोजक विकास ढाका को हल्द्वानी एसीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायालय ने गिरफ्तारी को नियमविरुद्ध मानते हुए यह राहत दी। विकास ढाका की ओर से अधिवक्ता गौरव पाण्डे ने जिरह की। वहीं, उत्तराखंड उच्च न्यायालय में विकास ढाका की अवैध गिरफ्तारी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याची को रिमांड शीट की प्रतिलिपि न्यायालय में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को तय की है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ पाण्डे ने दलील दी कि विकास ढाका पर जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, इसके बावजूद उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। उन्होंने अदालत को बताया कि विकास को सुबह 11:30 बजे पुलिस स्टेशन में बैठाए रखा गया, रात 9 बजे एफआईआर दर्ज की गई और रिमांड शीट में गिरफ्तारी अगले दिन सुबह 4 बजे दर्शाई गई। यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस दबाव में कार्य कर रही है।
मामला हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग (EVCL) से जुड़ा है। लीग का आयोजन मंगलवार से प्रस्तावित था, जिसमें पहला मुकाबला उत्तराखंड सोल्जर्स और दिल्ली नाइट्स के बीच खेला जाना था। उद्घाटन सत्र में लोक गायक राकेश खनवाल, कैलाश कुमार, रागनी ग्रुप, हर्षिता कोहली और अंकित कुमार की प्रस्तुतियां भी निर्धारित थीं।
प्रतियोगिता में मसूरी किंग्स, यूपी वारियर्स, हल्द्वानी टाइगर्स, दिल्ली नाइट्स, उत्तराखंड सोल्जर्स और वाराणसी वाइपर्स की टीमें भाग लेने वाली थीं। हालांकि देर शाम तक मैच शुरू नहीं होने पर आयोजक विकास ढाका ने जानकारी दी कि उनके दिल्ली निवासी बड़े साझेदार प्रमोद सिंह की हल्द्वानी आते समय हृदयगति रुकने से मृत्यु हो गई, जिसके चलते शोक स्वरूप मैच स्थगित किया गया।
इसके बाद टिकट खरीदारों और क्रिकेट प्रेमियों की शिकायत पर पुलिस ने बुधवार को विकास ढाका को सुसंगत धाराओं में गिरफ्तार कर लिया था। मामले में यह भी सामने आया कि लीग के प्रचार-प्रसार में हल्द्वानी और सितारगंज के कुछ नेताओं की भूमिका बताई जा रही है, जिन्होंने प्रमोटर बनकर टिकट बिक्री करवाई, लेकिन विवाद बढ़ने पर पल्ला झाड़ लिया।
फिलहाल, एसीजेएम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी मामला उच्च न्यायालय में लंबित है और पुलिस जांच जारी है।