सेहत के लिए हानिकारक है शराब, तो सेना में क्यों बैन नहीं है शराब, वजह है चौकानें वाली…

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 न्यूज टुडे नेटवर्क, नई दिल्ली : शराब को लेकर सभी एक मत में यह कहते हैं कि यह शरीर के लिए नुकसानदेह है। मगर क्या कभी आपने सोचा है कि सेना के जवानों को यह क्यों दी जाती है और वह भी कम दामों में। जबकि उन्हें तो बिल्कुल भी शराब नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि उनका दायित्व सीमाओं की सुरक्षा करना और आतंकियों से लोहा लेना होता है। सेना के जवानों का जीवन अत्यंत कठिन और अनुशासनपूर्ण होता है। अब ऐसे सवाल उठता है कि उन्हें शराब क्यों महैया कराई जाती है। तो आइए जानते हैं कि सेना में शराब क्यों बैन नहीं की जाती।

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क्यों जरुरी है शराब

सेना के जवानों की कामकाजी परिस्थितियों काफी कठिन होती हैं। सेना के जवानों को कठिन परिस्थितयिों और सबसे ठंडे इलाकों में तैनात रहकर देश की सुरक्षा करनी होती है। उन इलाकों में अकेले खड़े रहना और दूसरों को सुरक्षा देना आसान नहीं हात है। लिहाजा शराब उन्हें गर्म रखती है और कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रहने में मदद करती है।

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सेना में शराब पीने के कारण

  • सेना को बहुत मुश्किल परिस्थितियों में देश की रक्षा का काम करना पड़ता है। ठंडी से ठंडी जगहों पर भी वो सीमा पर खड़े रहते हैं। ऐसी जगहों और परिस्थितियों में शरबा सेना को गर्म रहने और जीवित रहने में मदद करती है।
  • जवानों को अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। जब वो ज्यादा व्यस्त नहीं होते हैं तो खाली समय में उन्हें अकेलापन महसूस होता है। शराब पीने से उन्हें इस खाली समय को गुजारने में मदद मिलती है।
  • जब ब्रिटिश हम पर राज करते थे तब उनकी सेना में भी एक परंपरा थी जिसके तहत हर अधिकारी और सेना का जवान एक निश्चित मात्रा में शराब का सेवन करेगा। बस यही परंपरा भारतीय सेना में भी आ गई।
  • जब सेना में किसी नए जवान की भर्ती होती है तो तो उसका स्वागत करने के लिए सभी को सीमित मात्रा में शराब पीनी होती है।

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ब्रिटिश सेना में शराब के सेवन की संस्कृति थी। हर अधिकारी और जवान के शराब पीने की मात्रा तय होती थी। आजादी के बाद यह परंपरा भारतीय सेना में चली आई। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि कोई ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में रहेगा। अधिकारियों की सीमित मात्र में शराब पीने की इजाजत मिली है। इसका ट्रैक रखने के लिए रजिस्ट्रार बनाए जाते हैं। यदि कोई अधिक नशे में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। और कुछ दुर्लभ मामलों में कोर्ट-मार्शल भी किया जाता है।