अदुभुत रहस्य – इस गांव के लोग चलते-चलते सो जाते हैं, वैज्ञानिकों के भी उड़ गए होश

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क्या आपने कभी सुना है कि कोई चलते-चलते सो गया। नहीं न लेकिन ऐसा होता है और वो भी एक शख्स के साथ नहीं पूरे गांव के साथ। लेकिन आज आपको हम जिस जगह के बारे में बता रहे है. वहां के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। क्योंकि यहां पर लोग पांच छह घंटे नहीं बल्कि हफ्तो तक सोते हुए नजर आते है। कजाकिस्तान में एक ऐसा गांव है जहां लोग गाड़ी चलाते समय या फिर चलते-चलते सडक़, दफ्तर या कहीं भी सो जाते हैं। वहीं जब ये लोग सोकर उठते हैं तो फिर उन्हें कुछ याद नहीं रहता।

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सोने का नहीं है कोई टाइम

इतना ही नहीं इनके सोने का कोई टाइम नहीं होता है. लोग यहां पर जाने के बाद चलते फिरते भी सो जाते हैं। दरअसल इस अनोखे गांव का नाम कजांव है जो कजाकिस्तान में स्थित है। कलाची नाम के इस गाँव में रहने वाले लोगों के सोनें का कोई समय नहीं है. यहां के लोग किसी भी समय में कहीं पर भी सो सकते हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि यहां पर एक या दो नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। और अगर एक बार इंसान सो गया तो वह काफी समय तक सोता ही रहता है।

जब वैज्ञानिकों के उड़ गए होश

ये मामला पहली बार साल 2010 में सामने आया था। कुछ बच्चे अचानक स्कूल में गिर गए थे और सोने लगे थे। इसके बाद इस बीमारी के शिकार लोगों की संख्या बढऩे लगी। तो वैज्ञानिक वहां पर शोध करने के लिए पहुंच गए। वैज्ञानिकों ने गांव का नजारा देखा तो उनके होश उड़ गए। तभी से वैज्ञानिक इस गांव पर रिसर्च कर रहे हैं। जहां शोधकर्ताओं के अनुसार गांव की करीब 800 लोगों की आबादी है। जहां पर करीब 200 लोग इस परेशानी से जूझ रहे हैं।

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इतना ही नहीं बहुत से लोगों की नींद के दौरान ही मौत हो जाती है। शोध में ये भी पता चला कि इस गाँव में हाइड्रोकार्बन-कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर बहुत अधिक है। जिसकी वजह से लोगों को नींद अधिक आती है। वैज्ञानिकों के शोध मे सामने आया कि गाँव के आसपास जो यूरेनियम की खदान हैं, उनमें से बहुत अधिक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड का निकास होता है। जिससे गांव को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। वहीं कजाकिस्तान सरकार ने लोगों को दूसरी जगह पर पुनर्वास की व्यव्सथा की है।

लोग कर रहे हैं पलायन

इस बीमारी की वजह से लागतार लोग इस गांव से पलायन कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से यहां काफी लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं।  इसे लेकर वहां के मूल निवासियों का कहना है कि यहां मौजूद यूरेनियम माइंस के कारण ऐसा हो रहा है. दरअसल, इस गैस के प्रभाव के कारण लोग बेहोश तक हो जाते हैं.

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