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अब निजी प्राइवेट स्कूल फीस का मामला संसद तक पहुंचा, अब सरकार बनाने जा रही ये कानून !

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पूरे देश में कुकुरमुत्तों की तहर खुले निजी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी तौर पर बढ़ती फीस और फीस के नाम पर अभिभावकों की काटी जा रही जेब का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। राज्य सभा के शून्य काल के दौरान सदस्यों ने यह निजी स्कूल में फीस का मामला उठाया। उन्होंने सरकार के सामने निजी स्कूलों की तेजी से बढ़ती फीस को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने की मांग रखी है। त्तराखंड में फीस एक्ट बनाया जा रहा है।

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शून्य काल में भाजपा के श्वेत मलिक ने कहा कि  ‘कुछ उद्योगपति शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और इस क्षेत्र में भी व्‍यापार की तरह काम कर रहे हैं।  इस क्षेत्र को उन्‍होंने मुनाफे का जरिया बना लिया है। ‘ उन्होंने कहा कि “खून चूसने वाले”  निजी स्‍कूलों में इमारत के नाम पर शुल्‍क लिया जाता है। निश्चित जगह से किताबें और स्‍कूल यूनिफॉर्म खरीदने का निर्देश जारी किया जाता है. इन जगहों पर हमेशा अन्‍य दुकानों से सामान महंगे मिलते हैं। लेकिन अभिभावकों को न चाहते हुए भी दोगुने या ज्यादा पैसे चुकाकर किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने पड़ते हैं। मलिक ने कहा कि बच्चों के अभिभावक अपने लिए घर नहीं बनवा पाते और एक ही स्कूल की एक से अधिक इमारतें खड़ी हो जाती हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सरकार से फीस नियंत्रित करने की मांग की।

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मानमानी फीस पर किसने क्या कहा

सपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्कूलों की फीस में 150 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। 2018 में प्रदेश में निजी स्कूलों के नियंत्रण के लिए कानून तो बनाया गया, लेकिन इसका क्रियान्वयन नहीं हो सका है। अब केंद्र को निजी स्कूलों के अभिभावकों का शोषण रोकने के लिए कानून बनाना चाहिए।

राज्यसभा में मनमाने तरीके से बढ़ती फीस पर हुई चर्चा के दौरान कई अलग-अलग दलों के प्र्तिनिधियों ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कानून बनाए जाने पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा सालों से जगह-जगह अभिभावकों और उनके संगठनों द्वारा भी ये मुद्दा उठाया जाता रहा है। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सवाल किया कि अब क्या राज्यसभा में मांग उठने के बाद सरकार निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करने के लिए कोई कानून बनाएगी? जिससे अभिभावकों से फीस के नाम पर हो रही लूट बंद हो सके।