drishti haldwani

उत्तराखंड के इन 7 जिलों में खुलेंगे 9 फायर स्टेशन… इन 343 पदों पर जल्द होने जा रहीं भर्तियां

270

उत्तराखंड में आग की वजह से जंगल बच नहीं रहे…उम्मीद है भविष्य में ऐसा नहीं होगा। क्योंकि अब उत्तराखंड में आगजनी या ऐसी ही दूसरी आपात स्थितियों में समय रहते मदद मिल पाएगी। अग्निकांडों पर काबू पाना संभव होगा। क्योंकि प्रदेश के 7  जिलों में फायर स्टेशन खोलने के फैसले को शासन की तरफ से हरी झंडी मिल गई है। शासन ने 9 फायर स्टेशन यूनिट स्थापित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ये जनहित में लिया गया बड़ा फैसला है। साल 2012 से सूबे में नए फायर स्टेशन बनाए जाने की मांग की जा रही थी। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में कई बार शासन को प्रस्ताव भी भेजा, पर कभी बजट तो कभी संसाधनों की कमी की वजह से इस पर फैसला नहीं हो सका।

iimt haldwani

fire1

इन जिलों में बनने जा रहे फायर स्टेशन

पिछले साल 14 मार्च को पुलिस मुख्यालय ने शासन को 9 जिलों में 11 फायर स्टेशन बनाने का प्रस्ताव भेजा था। इनके परीक्षण में 7 जिलों में फायर स्टेशन संबंधी मानक पूरे पाए गए, जिसके बाद शासन ने फायर स्टेशन खोलने की अनुमति दे दी। चलिए अब आपको बताते हैं कि नए फायर स्टेशन कहां बनेंगे।

देहरादून जिले के डोईवाला और त्यूणी, पौड़ी जिले के श्रीनगर और थलीसैंण, टिहरी के घनसाली और चमोली जिले के बदरीनाथ धाम में फायर स्टेशन बनाने को मंजूरी मिली है। इसी तरह पिथौरागढ़ के डीडीहाट, ऊधमसिंहनगर में बाजपुर और हरिद्वार के भगवानपुर में फायर स्टेशन बनेंगे। इसके साथ ही एक और अच्छी खबर है। बेरोजगार युवाओं को जल्द ही फायर सर्विस में जॉब पाने का मौका मिलेगा। फायर सर्विस में 343 खाली पदों पर जल्द ही सिपाहियों की भर्ती होगी।

fire2

इन पदों पर जल्द होंगी भर्तियां

सिपाहियों की भर्ती के लिए शासन की अनुमति मिलने का इंतजार है। साथ ही 18 पदों को आउटसोर्स के जरिए भरा जाना है। आपको बता दें कि सूबे के 13 जिलों में 35 फायर स्टेशन हैं, जिनमें 253 पद सालों से खाली हैं। अब नए फायर स्टेशनों के लिए भी 90 पद स्वीकृत किए गए हैं। यानि अब कुल 343 पदों पर युवाओं की भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया से लीडिंग फायरमैन, फायर सर्विस चालक, फायर मैन के पद भरे जाएंगे। आईजी कार्मिक जीएस मार्तोलिया ने कहा कि नए फायर स्टेशन बनने से आगजनी जैसी आपदा से निपटने में मदद मिलेगी। पुलिस मुख्यालय ने स्थायी भवन और कर्मचारियों की व्यवस्था होने तक मौजूदा संसाधनों और कार्मिकों से काम लेने के निर्देश दिए हैं।