पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की 6 सबसे बड़ी गलतियों ने भारत को विश्व गुरू बनने से रोक दिया, कारण जान आपके उड़ जाएंगे होश

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : भारत पर 200 साल तक अंग्रेजों ने राज किया। भारत को आजादी इतनी आसानी से नही मिली। भारत को आजादी दिलाने में अनेक क्रांतिकारियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था, उसके लिए भारतवर्ष और यहां की जननी ने अपने वीर सपूतों को खुद के आंचल में दम तोड़ते हुए देखा है। गुलामी के वक्त भारत मे देश को आजाद कराने के चक्कर मे यहां के राजनेता, वीरों की शहादत पर अपनी राजनीतिक दलों का निर्माण कर रहे थे। जिनमें एक राजनेता ऐसे भी थे जिन्होंने भारत को आजादी तो जरूर दिलवाई, लेकिन भारत का नुकसान भी बहुत करवाया। यह नुकसान भारत अभी भी भुगत रहा है। जवाहर लाल नेहरू ने भारत के विकास के नाम पर देशवासियों को खूब ठगा व लूटा। जवाहरलाल नेहरू के बारे में आपने कई अच्छे काम सुने होंगे। लेकिन आज हम आपको इस आर्टिकल में जवाहरलाल नेहरू के उन पांच गलतियों के बारे में बताएंगे जिसके वजह से भारत अभी भी अपना नुकसान सह रहा है।

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जवाहर लाल नेहरू की 6 बड़ी गलतियां


1) कोको आईलैंड- जवाहरलाल नेहरू ने सन 1950 में भारत का कोको द्वीप समूह मयन मान को गिफ्ट दे दिया। बता दे यह आईलैंड कोलकाता से सिर्फ 900 किलोमीटर दूरी पर है। बाद में मयन मार ने कोको द्वीप समूह चाइना को किराए पर दे दिया। जहां से आज भी चाइना भारत की हर गतिविधियों पर नजर रखता है।

2) काबू व्हेली मणिपुर – 13 जनवरी 1954 को नेहरू ने भारत का दूसरा कश्मीर कहे जाने वाली “काबू व्हेली” दोस्ती की याद में बर्मा को बड़ी आसानी से दे दी, जो कि इनकी सबसे बड़ी गलतियो में से एक है। काबू व्हेली लगभग 11000 स्के. किमी में फैली हुई थीं. बर्मा ने काबू व्हेली का अधिक हिस्सा चीन को दे रखा है जिसकी वजह से चाइना भारत पर नजर रखता है और वह भारत मे आए दिन मुठभेड़ करता रहता है। बता दें काबू दुनिया के सबसे खूबसूरत जगह में से एक है. जिसकी तुलना कश्मीर से की जाती है।

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3) भारत-नेपाल विलय – साल 1952 में नेपाल के तत्कालीन राजा त्रिभुवन विक्रम शाह ने नेपाल को भारत मे विलय कर लेने की बात पंडित ज्वाहरलाल नेहरू से कही थी। लेकिन नेहरू ने बात टाल दी। उन्होंने कहा की नेपाल भारत में विलय होने से दोनों देशों को फायदे के बजाय नुकसान होगा और नेपाल का टूरिज्म भी बंद हो जाएगा।

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4)1962 भारत -चीन युद्ध : नेहरू ने 1954 में चीन को पंचशील समझौते के लिए मनाया। तब भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा करार दे दिया था, जो कि नेहरू की सबसे बड़ी गलती थी। 1962 में भारत इस युद्ध मे चाइना के हाथों परास्त हो गया था। इस हार के कारणों को सही प्रकार से जानने के लिए ले.जर्नल हेंडरसन ओर कमांडेंट बिग्रेडियर भारत सरकार की अगुवाई में एक समिति का गठन किया गया। जिसमे मूल रूप से भारत के प्रधानमंत्री पद पर मौजूद जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया गया था। नेहरू ने “हिंदी चीनी भाई-भाई” का नारा देते हुए चीनी सेना को भारत मे आने का रास्ता दे दिया और भारतीय सेना को रोके रखा। जिसका फायदा उठाकर चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम ओर असम होते हुए भारत मे अंदर तक आ गयी जिसके परिणाम स्वरूप चीन ने कश्मीर का 14000 स्क्वार. किमी. भाग पर अपना कब्जा बना लिया था।

5) यूएन परमानेंट सीट– नेहरू ने 1953 में अमेरिका की उस पेशकश को ठुकरा दिया, जिसमें भारत को सुरक्षा के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए कहा गया था। लेकिन नेहरू जी ने बिना सोचे समझे इसकी जगह चीन को सुरक्षा परिषद में शामिल करने की सलाह दे दी। जिसके वजह से चीन और पाकिस्तान दोनों मिलकर भारत के कई प्रस्ताव यूएन में ठुकरा देते हैं। हाल ही में आतंकवादी मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय घोषित करने का भारत का यह प्रस्ताव चीन ने ठुकरा दिया।

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6) जवाहरलाल नेहरू और लेडी मांउटबेटन – लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला ने अपनी एक किताब में जवाहरलाल नेहरू और लेडी माउंटबेटन के संबंध के बारे में बताया है। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि लॉर्ड माउंटबेटन भी जवाहरलाल नेहरू और लेडी माउंटबेटन को अकेला छोड़ देते थे। लेकिन लोग कहते हैं कि ऐसा कर के लॉर्ड माउंटबेटन जवाहरलाल नेहरू से भारतीय सेना और आर्थिक निति के कई बातें निकलवाते थे।