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400 साल पुराने इस मंदिर में मूर्तियां आपस में करती हैं बातें, वैज्ञानिक भी हैरान …

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बिहार – आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मंदिर में मूर्तियां आपस में बात करती हैं, और इन मूर्तियों से आवाज भी निकलती है। जो भी लोग बिहार के बक्सर में बने इस मंदिर में आए हैं उन्होंने भगवान और भगवान की शक्तियों पर विश्वास करना शुरू कर दिया है। यह मंदिर 400 वर्ष पुराना है। प्रसिद्ध तांत्रिक भवानी मिश्र ने करीब 400 वर्ष पहले इस मंदिर की स्थापना की थी। तब से आज तक इस मंदिर में उन्हीं के परिवार के सदस्य पुजारी बनते रहे हैं। तंत्र साधना से ही यहां माता की प्राण प्रतिष्ठा की गई है।

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इस मंदिर में मूर्तियां करती हैं आपस में बात

बक्सर के इस मंदिर में मां की शक्तियां लोगों को देखने को मिलती है। तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के इस इकलौते राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में यहां पर किसी के नहीं होने पर आवाजें सुनाई देती हैं। इस मंदिर में दस महाविद्याओं काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्न मस्ता, षोडसी, मातंगड़ी, कमला, उग्र तारा, भुवनेश्वरी की मूर्तियां स्थापित हैं। इसके अलावा यहां बंगलामुखी माता, दत्तात्रेय भैरव, बटुक भैरव, अन्नपूर्णा भैरव, काल भैरव व मातंगी भैरव की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां साधना करने वाले हर साधकों की हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। देर रात तक साधक इस मंदिर में साधना में लीन रहते हैं।

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वैज्ञानिकों ने भी मानी आवाज सुनने की बात

वैज्ञानिकों की मानें, तो यह कोई वहम नहीं है। इस मंदिर के परिसर में कुछ शब्द गूंजते रहते हैं। यहां पर वैज्ञानिकों की एक टीम भी गई थी, जिन्होंने रिसर्च करने के बाद कहा कि यहां पर कोई आदमी नहीं है। इस कारण यहां पर शब्द भ्रमण करते रहते हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी मान लिया है कि हां पर कुछ न कुछ अजीब घटित होता है, जिससे कि यहां पर आवाज आती है। लेकिन वह ये पता नहीं लगा पाए हैं कि आखिर इस मंदिर में ये आवाज कहां से आती है। यहां पर आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो रात्रि के वक्त इस मंदिर के पास से गुजरते समय उनको कई आवाजें सुनाई देती हैं।

मानो या न मानो

मानो या न मानो यह एक चमत्कार ही है कि यहां अजीब तरह के आवाजें आती है जो कि किसी मानव की आवाजों की तरह की है। माना जाता है कि संपूर्ण अखंड भारत में जहां भी माता के शक्तिपीठ हैं वे सभी जागृत और सिद्ध शक्तिपीठ हैं। मुगलों ने देश के कई मंदिरों को ध्वस्त किया लेकिन वे इन शक्तिपीठों को कभी खंडित नहीं कर पाए। ऐसा दुस्साहस करने वाले काल के मुख में समा गए हैं।