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देहरादून- हर्रावाला में बनेगा 300 बेड का अस्पताल, जारी हुई निर्माण के लिए पहली किश्त ये होगा नाम

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देहरादून- न्यूज टुडे नेटवर्क: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के हर्रावाला में 300 बेड के अस्पताल का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि कैंसर, जच्चा-बच्चा समेत मल्टीस्पेशिलिटी वाले इस अस्पताल को 100 शैय्याओं से शुरू किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में 164 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। अस्पताल के लिए 15 बीघा जमीन दून के प्रतिष्ठित ओबरॉय परिवार ने दी है। ऐसे में इसका नाम ‘शकुतलारानी सरदारीलाल ओबरॉय अस्पताल’ रखा जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अस्पताल समेत पर्यटन, सिंचाई व एमडीडीए की विभिन्न विकास योजनाओं के लगभग 540 करोड़ के कार्यो का भी शिलान्यास किया। सीएम ने कहा कि पिछले दो सालों में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार, पलायन आदि क्षेत्रों में विशेष बल दिया रहा है।

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43 गावों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा

इस दौरान सीएम ने कहा कि अपना कार्यालय मिल जाने के बाद आयोग अधिक क्षमता के साथ कार्य कर सकेगा। उन्होंने बताया कि पिछले 22 माह में आयोग ने 36 भर्ती परीक्षाएं कराई गई, जिसमें 2221 नई नियुक्तिया की गई। जबकि 2014 से मार्च 2017 तक सिर्फ 06 परीक्षाएं कराई गई जिसमें 819 नई नियुक्तिया हुई। ग्रेविटी वाटर उपलब्ध कराने का लक्ष्य सीएम ने कहा कि देहरादून को 60 प्रतिशत ग्रेविटी का पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सृदृढ़ व्यवस्था की जा रही ही।

सौंग बाध परियोजना का जल्द ही शिलान्यास किया जाएगा। इस बाध को 350 दिन में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बजट का प्रावधान किया जा चुका है। इस बाध के निर्माण से प्रतिवर्ष 92 करोड़ रुपये की बिजली बचत होगी। सूर्यधार पेयजल योजना पर कार्य शुरू हो गया है। इस परियोजना से 43 गावों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध होगा तथा बिजली की भी बचत होगी। शौर्य स्थल बनाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में एक भव्य शौर्य स्थल बनाया जाएगा। इसके लिए बजट में प्राविधान किया जा चुका है।

शौर्य स्थल के लिए होगा भूमि का चयन

शौर्य स्थल के लिए जल्द भूमि का चयन किया जाएगा। शौर्य स्थल बनाने के लिए एक कमेटी बनाई जायेगी, जिसमें सेना के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। साइंस सिटी बनेगी उत्तराखंड में जल्द ही साइंस सिटी भी अस्तित्व में आ जाएगी। साइंस सिटी बनाने के लिए केंद्र से स्वीकृति मिल चुकी है। इससे बच्चो को विज्ञान के आधुनिक तौर-तरीको की जानकारी के साथ ही अन्वेषण करने का मौका मिलेगा।