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2019 लोस चुनाव : महाराष्ट्र में गठबंधन के करीब शिवसेना-बीजेपी, शिवसेना ने रखी हैं कुछ शर्तें

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मुंबई-न्यूज टुुडे नेटवर्क । आगामी लोकसभा चुनाव में मतभेदों को भुलाकर शिवसेना को एक साथ लाने की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुहिम अब रंग लाती दिख रही है। राज्य में बीजेपी और शिवसेना दोनों ही समझौते के काफी करीब हैं और बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि भी की है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि शिवसेना ने गठबंधन से पहले बीजेपी के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। पिछले कई महीने से दोनों दलों के बीच काफी बयानबाजी हुई है, और कई बार ऐसा लगा कि शिवसेना बीजेपी से अलग हो सकती है।

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दोनों दलों के बीच कभी भी गठबंधन का हो सकता है ऐलान 

बीजेपी के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि शिवसेना-बीजेपी के बीच रोज बैठक हो रही है। इन दोनों दलों के बीच कभी भी गठबंधन का ऐलान हो सकता है। बीजेपी नेता ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में बातचीत में काफी प्रगति हुई है लेकिन हम पूरा विवरण नहीं जानते हैं क्योंकि केवल मुख्यमंत्री बातचीत कर रहे हैं और उन्होंने इस बारे में केवल पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को बताया है। हालांकि हमें जहां तक सूचना मिली है, अब कुछ ही कठिन बिंदु बचे हैं जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है।’ बता दें कि पिछले दिनों महापौर बंगले में शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई चाय पर चर्चा के बाद दोनों पार्टियों के बीच संबंधों की गर्माहट फिर से बढऩे की खबर आने लगी हैं।

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शिवसेना ने रखी हैं कुछ ये शर्तें-

खबर आ रही है कि गठबंधन के लिए शिवसेना ने बीजेपी के सामने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा के लिए 2014 के बंटवारे को ही यथावत रखने का प्रस्ताव दिया गया है। जबकि बीजेपी के सामने शिवसेना ने शर्त रखी है कि पालघर की सीट उसे दी जाए।
बीजेपी के सामने शिवसेना ने शर्त रखी है कि बराबर का बंटवारा किया जाए। वहीं, ये भी खबर आई है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने महाराष्ट्र के नेताओं को संदेश दिया है कि राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया है कि कार्यकर्ता किसी भ्रम में ना रहें। हालांकि ये कहा जा रहा है कि शिवसेना लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के पक्ष में है।

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मिलकर लड़े चुनाव तो मिलेंगी इतनी सीटें?

इस आंतरिक सर्वे के मुताबिक, अगर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना साथ मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो दोनों का गठबंधन 30 से 34 सीटों पर जीत हासिल कर सकता है। वहीं, इस हालात में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 18 से 20 सीटों पर जीत मिल सकती है। लेकिन… अगर भाजपा और शिवसेना अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरती हैं तो बीजेपी को 48 में से महज 15-18 सीटें ही मिलेंगी, जबकि शिवसेना भी 8 से 10 सीटों पर सिमट सकती है। इस सर्वे की मानें तो भाजपा और शिवसेना के अलग-अलग चुनाव लडऩे की दशा में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को जबरदस्त फायदा होगा और वो 22 से 28 लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा जमा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़े थे और महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 41 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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शिवसेना सांसद संजय राउत क्या कहते हैं?

हालांकि शिवसेना के सांसद संजय राउत से जब गठबंधन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गठबंधन की चर्चा के बारे में कुछ मालूम नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवसेना सेहरा बांधकर किसी के प्रस्ताव का इंतजार नहीं कर रही है। हम तो कब का अकेले चुनाव लडऩे का ऐलान कर चुके हैं और पार्टी इसकी तैयारी में लगी है।