देहरादून-लाॅकडाउन के दौरान उत्तराखंड में 20 प्रतिशत बढे़ सुसाइड केस, ये जिला रहा टाॅप पर

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प्रदेश भर में अब लाॅकडाउन का असर लोगों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है, जिस वजह से आत्महत्या जैसे मामले सामने आ रहे है। बात अगर उत्तराखंड की करें तो यहां पर लाॅकडाउन के दौरान आत्महत्या के मामलों में वृद्धि होती जा रही है। उत्तराखंड में आत्महत्या के मामलों का इतिहास को देखते हुए उसमें करीब पिछले 4 महीनों से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश भर में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे है। सिर्फ शहरों में ही नही बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी लोग तनाव के चलते आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे है।

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अगर बात जनवरी की करें तो जनवरी में करीब 187 लोगों द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आए है, जिसमें पहले नम्बर पर हरिद्वार है जहां पर कुल 42 मामले आत्महत्या के सामने आए है। जिसमें 27 पुरूष, 2 नाबालिक और 13 महिलाएं है। वहीं देहरादून में भी 18 पुरुष, 20 महिला और 4 बच्चों ने सुसाइड किया है। इसी तरह नैनीताल की स्थिति भी मनोवैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है, आर्थिक तंगी, रिश्तों में तनाव और कैरियर में असफलता इसके पीछे बड़ी वजह है। डाॅ. मुकुल शर्मा का कहना है कि लोगों को डिप्रेशन का दर्द झेलना चाहिए।

और अपनी मनोस्थिति को स्वीकार करते हुए डिप्रेशन से लड़ना बेहद जरूरी है। उन्होने बताया कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद देश स्तब्ध है। देश में फिल्मी सितारों द्वारा भी आत्महत्या जैसे कदम उठाए जा रहे है जो कि बेहद निंदनीय है। उन्होने बताया कि ऐसे हालातों में लोगों को ऐसा कदम उठाने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और समस्याओं को खुलके बताना चाहिये।

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