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2 अक्टूबर गांधी जयंती – महात्मा गांधी के इन मुख्य आंदोलनों के कारण मिली भारत को आजादी

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गांधी जयंती – ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी, जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था, महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद उत्तम चंद गांधी था। और वह पोरबंदर के दीवान थे। ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी को दुनिया भर में उनके विशाल योगदान के लिए काफी प्रशंसा मिली। महात्मा गांधी के जन्मदिवस को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी ने 1906 में ट्रांसवाल एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट के खिलाफ पहला सत्याग्रह अभियान चलाया और साल 1920 में वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और 26 जनवरी 1930 को ब्रिटिश हुकूमत से भारत की आजादी का ऐलान किया।

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वहीं उसके बाद 1917 में उन्होंने चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन जैसे कई आंदोलन चलाए और इन आंदोलनों की वजह से ही भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली। 13 साल की उम्र में गांधी जी की शादी उनसे एक साल बड़ी कस्तूरबा गांधी के साथ हुई। गांधी जी, पिछली पीढिय़ों के लिए और आने वाली पीढिय़ों के लिए अहिंसा, सहिष्णुता, सच्चाई और सामाजिक कल्याण पर अपने विचारों के लिए, एक सच्ची प्रेरणा रहे हैं। महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं महात्मा गांधी जी द्वारा चलाए गए आंदोलन के बारे में।

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चंपारण सत्याग्रह

1917 में बिहार के चंपारण में अंग्रेजों ने किसानों को उनकी उपजाऊ भूमि पर नील और अन्य नकदी फसलों को उगाने के लिए मजबूर किया और फिर इन फसलों को बहुत सस्ती कीमत पर बेच दिया। जिस वजह से किसानों को अत्यधिक गरीबी का सामना करना पड़ा जिसके कारण किसानों की स्थिति अधिक दयनीय हो गई। यह सुनकर महात्मा गांधी ने जिले का दौरा कर अंग्रेज जमींदारों के खिलाफ हड़ताल करके उन्हें झुकने को मजबूर कर दिया। इस आंदोलन की सफलता से गांधी जी को महात्मा की उपाधि प्राप्त हुई।

असहयोग आंदोलन

1 अगस्त 1920 शुरू हुए असहयोग आंदोलन आंदोलन के पीछे जलियावालां बाग हत्याकांड एकमात्र कारण था। इस आंदोलन के तहत लोगों से अपील की कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ असहयोग जताने को स्कूल, कॉलेज, न्यायालय न जाएं और न ही कर चुकाएं। यही वह समय था जब उन्होंने एक असहयोग आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया था। इस आंदोलन ने रफ्तार पकड़ ली और शीघ्र ही लोगों ने अंग्रेजों द्वारा संचालित संस्थानो जैसे स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। इस आंदोलन को शीघ्र ही स्वयं गांधी जी द्वारा समाप्त कर दिया गया था।

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नमक सत्याग्रह

आप सभी को बता दें कि नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रमुख आंदोलन में से एक था। इस आंदोलन को दांड़ी सत्याग्रह भी कहते हैं और नमक पर ब्रिटिश हुकूमत के एकाधिकार के खिलाफ 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रमुख आंदोलन में से एक था। इस दौरान अंग्रेजों ने चाय, कपड़ा, यहां तक कि नमक जैसी चीजों पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था। उस समय बापू ने दांडी में नमक बनाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा था।

दलित आंदोलन

वर्ष 1932 में महात्मा गांधी जी ने ‘अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग’ की स्थापना की और इसके बाद 8 मई 1933 से छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरुआत की और ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन करते हुए हरिजन आंदोलन में मदद के लिए 21 दिन का उपवास किया। उनका यह आंदोलन समाज से अस्यपृश्यता मिटाने के लिए था। पूना समझौते के बाद गांधी जी ने खुद को पूरी तरह से हरिजनों की सेवा में समर्पित कर दिया। दलितों के लिए हरिजन शब्द गांधी जी ने ही दिया था। हरिजन से उनका तात्पर्य था ईश्वर का आदमी।

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भारत छोड़ो आंदोलन

ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन गांधी जी का तीसरा बड़ा आंदोलन था और 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बंबई सत्र में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा दिया लेकिन इसके तुरंत बाद वह गिरफ्तार हुए। लेकिन देश भर के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोडफ़ोड़ के जरिए आंदोलन चलाते रहे। पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार की स्थापना कर दी गई थी। अंग्रेज भले ही भारत छोड़ो आंदोलन को रोकने में किसी भी तरह से सफल रहे हों लेकिन जल्द ही उन्हें यह महसूस हो गया था कि भारत में शासन करने के उनके दिन समाप्त हो चुके हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक, अंग्रेजों ने भारत को सभी अधिकार सौंपने के स्पष्ट संकेत दिए। आखिरकार, गांधी जी को यह आंदोलन समाप्त करना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप हजारों कैदियों की रिहाई हुई।