1920 में गांधी जी ने की थी जुबली पार्क में जनसभा, अब पार्क हुआ गायब

बरेली। असहयोग आन्दोलन के समय लगभग सन् 1920 में बरेली में आए महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने बरेली के जिस जुबली पार्क (Jubilee Park) में जन सभा को सम्बोधित किया था उस पार्क का नामोनिशान ही गायब हो चुका है। जब बरेली कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने जब इतिहास के पन्नों में बरेली के जुबली पार्क को देखा तो उन्होंने इस जुबली पार्क के दस्तावेजों की फाइलों (Files) को खोजने के आदेश दिए। कलक्ट्रेट के अभिलेखों में जुबली पार्क के मिले अभिलेखों में गाटा संख्या नं. 81 पर 3.743 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

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कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने खेवट देखने के बाद एसडीएम सदर को ईशान प्रताप सिंह से इस की रिपोर्ट (Report) तलब की। आदेष मिलने के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आया और जांच शुरू की तो पता चला कि जिस स्थान पर जुबली पार्क था वहां का नक्शा ही बदल गया है। पार्क का तो अता पता ही नहीं वहां पर सरकारी व निजी इमारतों (Public & Private Buildings) ने उस स्थान का स्वरूप बदल दिया। आज के समय में उस स्थान को सिविल लाइन के नाम से पहचाना जाता है। जुबली पार्क के स्थान पर संजय कम्यूनिटी हाल (Sanjay Community Hall), अग्नि शमन कार्यालय (Fire Brigade Office), मेयर आवास और इस के आस पास निजी इमारते बनी दिखाई दे रही हैं।

संजय कम्युनिटी हाल के अन्दर एक तलाब भी नजर आता है। दूसरी ओर कार बाजार और सीतापुर नेत्र चिकत्सालय और उसके पीछे बनी दुकानें और दूसरे निर्माण दिखाई दे रहे हैं। गाटा संख्या नंबर 82 पर 0.923 हेक्टयर भूमि है। जानकारों की माने तो पुराना तलाब आज भी नजर आता है। मौके पर इसका कितना क्षेत्रफल है। यह अभी साफ नहीं है।

राजस्व टीम ही बताएगी कि मौके पर क्या जायज है क्या नाजायज। जुबली पार्क की पैमाईश के लिए एसडीएम सदर ने राजस्व निरीक्षण टीम गठित कर उससे रिकार्ड के अनुसार पार्क का रकबा और अवैध निर्माण को चिन्हित करने की रिपोर्ट मांगी है।

राजस्व टीम में राजस्व निरीक्षक राधेश्याम व भूदेव और लेखपाल नेत्रपाल व प्रेमपाल को शामिल किया गया है। सूत्रों की माने तो यह टीम इसी सप्ताह मौके पर पहुंचकर जुबली पार्क के क्षेत्रफल की नापजोख करके बतायेगी कि यहां कितना अवैध निर्माण है।

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