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हल्द्वानी- 18 को रण की तैयारी में घर-घर पहुंचे पहलवान, दंगल जीतना भाजपा-कांग्रेस के लिए बनी चुनौती

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क- निकाय चुनाव अपने अंतिम दौर में पहुंच चुके है। जिसके लिए सभी प्रत्याशियों ने जीतोड़ मेहनत की है। 18 नवम्बर को मतदान होगा। इतने दिनों के प्रचार अभियान से मतदाताओं ने भी अपना मन बना लिया है कि किसे वोट करना है। निकाय चुनाव में सबसे बड़ा दंगल हल्द्वानी नगर निगम में है। यहां एक तरफ पूर्व मेयर जोगेन्द्र रौतेला एक बार फिर चुनाव मैदान में है तो वही दूसरी ओर निकाय चुनाव के दंगल में पहली बार पूर्व मंडी समिति अध्यक्ष सुमित हृदयेश कूदे है। सुमित के लिए पहली जीत दर्ज करना बड़ी चुनौती है तो वहीं रौतेला के लिए अपना ताज बरकरार रखना। हालांकि इन दोनों को टक्कर देने के लिए सपा ने भी अपना जाल बिछाया है। सपा तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में निकाय चुनाव में है। पिछले बार के चुनावों में सपा दूसरे पायदान पर थी। तब सपा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के पसीने छूटा दिये थे। जिसके बाद इस बार यही उम्मीद की जा रही है कि हल्द्वानी नगर निगम में मुकाबला त्रिकोणीय होगा। कांगे्रेस और भाजपा की लड़ाई के बीच सपा की नजर सीट निकालने पर रहेगी। लेकिन इस बार भाजप-कांग्रेस दोनों दल सबसे ज्यादा सक्रिय है।

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तू डाल-डाल मैं पात-पात

भाजपा ने निकाय चुनाव के दंगल में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को प्रचार के लिए उतारा वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश सबसे आगे रहे। एक ओर भाजपा अपने विकास कार्यों को गिना रही है और आगे विकास की बात कर रही है। वहीं कांग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान किये गये कार्यो को जनता के बीच रख रही है। और वर्तमन में विकास का अवरूद्ध होना भाजपा पर थोप रही है। ऐसें में हल्द्वानी नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी जीत का आंकड़ा नगर निगम में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्रों से होगी। जिसका हर कोना कांग्रेस ने छान मारा है वहीं हर गली-गली भाजपा भी अपनी ताकल दिखाती नजर आयी। एक ओर सुमित हृदयेश अपनी माता इंदिरा हृदयेश के संग ग्रामीण क्षेत्रों मेंं गये तो वहीं भाजपा के मेयर प्रत्याशी जोगेन्द्र रौतेला भी कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत और पूर्व दर्जा मंत्री हेमंत द्विवेदी के साथ लगातार जनसंपर्क करते नजर आये। ऐसे में दोनों दलोंं को परिणाम का इंतेजार है।

मेरा गढ़ मेरा विकास

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश देखने को मिला है कि भाजपा अपना गढ़ मान रही है। यानी भाजपा का कहना है कि हाल ही नगर निगम में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्र भाजपा मय है। लेकिन कांग्रेस ने बाजी पलटते हुए अपने दस साल के कार्यों का मूल्यांकन कर दिया। कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्रों को भाजपा विहीन दिखाने की कोशिश की। कांग्रेस का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा विकास कांग्रेस की सरकार में हुआ। इसके बाद आज तक ग्रामीण क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। वहीं भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों को अपना गढ़ मानती है और विकास किया है विकास करेंगे वाले नारे पर अडिग है। ऐसे में भाजपा पर अपना गढ़ बचाने औार कांग्रेस के लिए विकास कार्यों का फायदा लेना बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल ये नहीे कहा जा सकता कि ऊंट की करवट बैठेगा। लेकिन फिर भी हर कोई पार्टी अपनी-अपनी जीत के दांवे कर रही है।