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15 अगस्त को भारत ही नहीं ये चार देश भी हुए थे आजाद, जानिए आजादी की पूरी कहानी…

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अंग्रेजों की 200 सालों की गुलामी के बाद भारत को आखिरकार आजादी तो मिल गई, लेकिन क्‍या आपको पता है 15 अगस्‍त की तारीख को केवल भारत ही नहीं बल्‍कि दुनिया के चार और देशों को आजादी मिली थी। ये चार देश थे- दक्षिण कोरिया, बहरीन, और कांगो।   भारत 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी। इस 15 अगस्त को भारत को आजाद हुए 72 साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है 15 अगस्त की तारीख को केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के तीन और देशों की आजादी मिली थी। ये तीन देश थे दक्षिण कोरिया, बहरीन , कांगो और लिकटेंस्टीन 15 अगस्त के ही दिन इन तीन देशों को भी आजादी मिली थी।

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1945 – दक्षिण कोरिया की आजादी का दिन

दक्षिण कोरिया को 15 अगस्त 1945 में जापान से आजादी मिली थी। कोरिया 1948 तक संयुक्त था, उस समय इसे दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया में विभाजित कर दिया गया। साल 1910 से लेकर साल 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप जापान के कब्जे में रहा।

1971- बहरीन की आजादी का दिन

बहरीन को 15 अगस्त 1971 को ब्रिटेन से आजादी मिली। इसकी राजधानी मनामा है। ये अरब जगत का एक हिस्सा है जो एक द्वीप पर बसा हुआ है। 1985 में नेशनल असेंबली भंग हुई, जो अब तक बहाल नहीं हो पाई है। 1990 में कुवैत पर इराक के आक्रमण के बाद बहरीन संयुक्त राष्ट्रसंघ का सदस्य बना।

1960 – कांगो की आजादी का दिन

15 अगस्त 1960 को कांगो फ्रांस से आजाद हुआ। कांगो 80 साल तक फ्रेंच के शासन के तहत रहा। कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य अफ्रीका महाद्वीप के मध्य में स्थित देश है, जिसका कुछ भू-भाग अंध महासागर से मिलता है। क्षेत्रफल के अनुसार यह विश्व का 11वां सबसे बड़ा देश है और फ्रांसीसी भाषा बोलने वाला सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।

1866 – लिकटेंस्टीन की आजादी का दिन

भारत, दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो के अलावा लिकटेंस्टीन भी एक ऐसा देश है जो अपनी आजादी का जश्न 15 अगस्त को मनाता है। लिकटेंस्टीन पश्चिमी यूरोप में स्थित एक छोटा लैंडलॉक देश है। इस देश की आबादी मात्र 35,000 है। लिकटेंस्टीन की राजधानी वादुज है। लिकटेंस्टीन ने 15 अगस्त 1866 को जर्मनी से आजादी हासिल की थी। भारत के अलावा ये चार देश भी 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाते है।

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ब्रिटेन भारत को 1948 में आजाद करना चाहता था लेकिन…

भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने निजी तौर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए 15 अगस्त का दिन तय किया था, क्योंकि इस दिन को वे अपने कार्यकाल के लिए बेहद सौभाग्यशाली मानते थे। सबसे बड़ी चौकानें वाली बात ये है कि ब्रिटेन तो भारत को 1947 को नहीं, बल्कि उसके अगले साल 1948 में आजाद करना चाहता था, जबकि महात्मा गांधी के भारत छाड़ों आंदोलन से अंग्रेज इतने परेशान हो चुके थे, कि उन्होंने भारत को एक साल पहले ही यानि 15 अगस्त 1947 को ही आजाद करने के विचार पर फैसला ले लिया था। भारत में आजादी की जंग पहले से यानी 1930 से शुरू हो गई थी।