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15 अगस्त 1947, रात 12 बजे ही क्यों आजाद हुआ भारत, आजादी के जश्र में महात्मा गांधी क्यों नही हुए शामिल

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हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 अगस्त को भारत 73वां स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेट करेगा। उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जाएगा, जिनकी कुर्बानियों की बदौलत देश को आजादी मिली। लेकिन इतने सालों के बाद भी आज ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब एक आम आदमी को नहीं मालूम। लेकिन आपने कभी सोचा है कि इस दिन में ऐसी क्या खास बात थी, जो हमें 15 अगस्त, 1947 को रात 12 बजे ही स्वतंत्रता मिली ? 15 अगस्त, 1947 को जब देश आजाद हुआ तब इसका जमकर जश्न मनाया गया, लेकिन उस वक्त देश का कोई राष्ट्रगान नहीं था। तब सिर्फ वंदे मातरम् के नारे के साथ आजादी को सेलिब्रेट किया गया। तो आईए आज हम आपके इन सवालों के जवाब देते हैं।

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भारत 1947 को क्यों आजाद हुआ ?

1940 के दशक से हो रहे जबरदस्त आंदोलन से अंग्रेजों पर जबरदस्त दबाव था। साथ ही 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों की आर्थिक हालत खराब हो गई थी। वह दूसरे देशों की बात तो छोड़ो अपने देश पर शासन करने में ही असमर्थ थे। वहीं 1945 के ब्रिटिश चुनावों में लेबर पार्टी की जीत ने आजादी के द्वार खोल दिए थे, क्योंकि उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में भारत जैसी दूसरी इंग्लिश कॉलोनियों को भी आजादी देने की बात कही थी। फरवरी 1947 में लार्ड माउंटबेटन को भारत का आखिरी वाइसराय चुना गया था जिन पर व्यवस्थित तरीके से भारत को स्वतंत्रता दिलाने का कार्यभार था। शुरूआती योजना के अनुसार भारत को जून, 1948 में आजादी मिलने का प्रावधान था, लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था। जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू के बीच बंटवारे को लेकर पहले से ही रस्साकशी चल रही थी। जिन्ना ने अलग देश बनाने की मांग रख दी थी जिससे हालात और बिगड़ते चले गए और आजादी 1948 की जगह 1947 में ही देने की बात तय हो गई।

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15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई ?

15 अगस्त को भारत को ब्रिटिश राज से मुक्ति देने का फैसला वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन का था। यह वही दिन था जब 1945 को जापानी सेना ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरन एलाइड फोर्सेस के सामने आत्मसमपर्ण किया था। उस समय लॉर्ड माउंटबेटन अलाइड फोर्सेस के कमांडर थे। इसीलिए उन्होंने 15 अगस्त की तारीख भारत की आजादी के लिए चुनी।भारत के आखिरी वाइसराय लॉर्ड माउंटबैटन 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते थे, क्योंकि सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान 15 अगस्त, 1945 को ही जापानी आर्मी ने आत्मसमर्पण किया था। उस समय लॉर्ड माउंटबैटन अलाइड फोर्सेस के कमांडर थे। इसीलिए उन्होंने 15 अगस्त की तारीख भारत की आजादी के लिए चुनी।  इसके साथ ही अंग्रेजों ने जाते-जाते भी भारत की आजादी की तारीख को भी ऐसे दिन के साथ जोड़ दिया जिस जिन जापान की सेना ने अपने घुटने टेके थे। इतिहास के पन्नों में 15 अगस्त के साथ दो घटनाओं को जिक्र मिलता है- एक भारत की आजादी और दूसरी जापान की हार।

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रात 12 बजे ही क्यों आजाद हुआ भारत ?

लार्ड माउंटबैटन द्वारा आजादी की तारीख 3 जून, 1948 से 15 अगस्त, 1947 करने के बाद देश के ज्योतिषियों में खलबली मच गई। उनके अनुसार ये तारीख अमंगल और अपवित्र थी। इसके बाद ज्योतिषियों ने एक उपाय निकाला और आजादी के लिए 14 और 15 अगस्त की रात 12 बजे का समय तय किया। ऐसा इसलिए की अंग्रेजों के हिसाब से दिन 12 AM पर शुरू होता है, लेकिन हिंदू कैलेंडर के हिसाब से सूर्योदय पर। इसके साथ ही नेहरू जी को अपनी आजादी की स्पीच अभिजीत मुहूर्त में 11:51 PM से 12: 39 AM के बीच देने को कहा गया और इसमें एक शर्त ये भी थी कि नेहरू जी को अपनी स्पीच रात 12 बजे तक खत्म करनी थी।

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आजादी के जश्न में महात्मा गांधी जी नहीं थे शामिल

14 व 15 अगस्त को जब भारत अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, तब महात्मा गांधी वहां मौजूद नहीं थे । वह इस बात से खुश नहीं थे । वह बँटवारे की वजह से हो रहे तनाव व दंगों को रोकने के लिये कलकत्ता में अनशन पर बैठे थे। जब नेहरु जी ने उन्हें पत्र लिखकर बुलवाया तो उन्होंने कहा कि यहां दंगे हो रहे हैं 7 ऐसे में मैं आजादी की खुशी कैसे मना सकता हूँ ।