विविधता वाले हमारे देश की पहचान ही भारत, पूर्वज, और संस्कृति से है - मोहन भागवत

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्राचीनकाल से ही हमारे देश को विविधता का देश बताते हुए कहा है कि हमारी पहचान ही भारत, पूर्वज और संस्कृति से हैं। हम इसे छोड़ेंगे नहीं। सभी पूजा, भाषा वाले लोगों में यह तीनों बातें होती हैं।
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विविधता वाले हमारे देश की पहचान ही भारत, पूर्वज, और संस्कृति से है - मोहन भागवत नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्राचीनकाल से ही हमारे देश को विविधता का देश बताते हुए कहा है कि हमारी पहचान ही भारत, पूर्वज और संस्कृति से हैं। हम इसे छोड़ेंगे नहीं। सभी पूजा, भाषा वाले लोगों में यह तीनों बातें होती हैं।

संकल्प फाउंडेशन और पूर्व सिविल सेवा अधिकारी मंच द्वारा डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विश्व बाजार की बात तो सभी लोग करते हैं लेकिन केवल भारत ही है जो विश्व परिवार यानी वसुधैव कुटुंबकम की बात करता है। उन्होंने कहा कि हम केवल बात ही नहीं करते हैं बल्कि विश्व को कुटुंब बनाने के लिए कार्य भी करते हैं।

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हमारी राष्ट्रीयता विषय पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि प्राचीनकाल से ही हमारा देश विविधता का देश रहा है। हमारी भूमि ऐसी है जो अन्न, और जल के साथ संस्कार भी देती है इसलिए हम इसे भारत माता कहते हैं। उन्होंने भारत को पुण्यभूमि और कर्मभूमि बताते हुए कहा कि हमें एक नहीं होना है, हम एक हैं। हमारे पूर्वजों ने ये सिखाया और बताया है। हमारी संस्कृति की सुरक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है, लड़ाईयां लड़ी हैं और हमारी पहचान ही भारत, पूर्वज, संस्कृति से हैं। हम इसे छोड़ेंगे नहीं। सभी पूजा, भाषा वाले लोगों में यह तीनों बातें होती हैं।

भागवत ने आगे कहा कि पाश्चात्य देशों में नेशन का विकास और हमारे देश में राष्ट्र का विकास इसका क्रम पूरी तरह से अलग है। हमारा नेशनलिज्म और राष्ट्रवाद नहीं बल्कि हमारी तो राष्ट्रीयता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र ने कहा कि संघ से प्रेरणा व जानकारी मिलती है कि सामाजिक जीवन में भिन्न-भिन्न रूप से योगदान दे रहे लोग अलग-अलग कार्य से जुड़कर किस तरह से देश के लिए काम कर सकते हैं। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में भी चर्चा की गई। इस दौरान मोहन भागवत ने दोनों विषयों पर उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

व्याख्यानमाला के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संकल्प द्वारा संकलित पुस्तक भारतीय परिप्रेक्ष्य के अंग्रेजी संस्करण इंडियन पर्सपेक्टिव का भी लोकार्पण किया। इस पुस्तक में पूर्व के वर्षों में आयोजित व्याख्यानमाला में पधारे वक्ताओं - गृह मंत्री अमित शाह, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, स्वर्गीय सुषमा स्वराज, स्वर्गीय अनिल माधव दवे सहित 12 प्रमुख वक्ताओं के व्याख्यानों को शामिल किया गया हैं।

--आईएएनएस

एसटीपी/एएनएम