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रुद्रपुर: आगामी 50 साल तक सत्ता में इस तरह बनी रहेगी भाजपा

रुद्रपुर। भाजपा दक्षिणी मण्डल की प्रशिक्षण कार्यशाला भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित हुई। प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ भाजपा जिलाध्यक्ष शिव अरोरा, विधान सभा सयोजक खूब सिंह विकल व अध्यक्ष सुशील यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष शिव अरोरा ने 2014 के बाद भारत की बदलती राजनीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 2014 में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां देश से क्षेत्रवाद, जातिवाद, संप्रदायिकता वाद को खत्म किया, वहीं देश के अंदर राष्ट्रवाद, संस्कृति वाद और एकात्म वाद का वातावरण बनाने में सहयोग प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि देश के भाजपा के विकास को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम चरण में जनसंघ के रूप में, दुसरे में 1977 से 2004 के बीच गठबंधन की राजनीति में एक प्रमुख साझेदार के तौर पर और अंतिम में 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक बहुमत वाली पार्टी के रूप में उभार। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सर संघचालक श्रीगुरुजी से मुलाकात के बाद जनसंघ के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। यह प्रक्रिया मई, 1951 से शुरू होकर 21 अक्टूबर, 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में भारतीय जनसंघ के गठन के साथ पूरी हुई। आयताकार भगवाध्वज को इस पार्टी के झंडे के रूप में और उस पर अंकित दीपक को चुनाव चिन्ह के रूप में स्वीकार किया गया। उसी उद्घाटन सत्र में पहले आम चुनाव के घोषणापत्र की भी मंजूरी दी गई थी। प्रथम आम चुनाव में जनसंघ को 3.06 प्रतिशत वोट मिले और डॉ. मुखर्जी सहित तीन सांसद चुनकर आए। जनसंघ को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला। संसद में डॉ. मखर्जी के नेतृत्व में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया गया। अकाली दल, गणतंत्र परिषद, हिंदू महासभा, तमिलनाडु टॉइलर्स पार्टी, कॉमनविल पार्टी, द्रविड़ कजगम, लोक सेवक संघ और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ 38 सांसद (32 लोकसभा और 6 राज्य सभा सांसद) इसमें शामिल हुए। इस प्रकार भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष डॉ. मुखर्जी पहले विपक्ष के नेता बनें। 29 मई, 1952 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने भारतीय संघ के तहत स्वायत्त राज्य के प्रस्ताव को स्वीकार किया और 24 जुलाई को नेहरू-अब्दुल्ला ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह जम्मू-कश्मीर को अलग राज्य बनाने की साजिश थी, जिसका भारत में पहले ही विलय हो चुका था। इसके तहत राज्य के लिए अलग संविधान, अलग प्रधानमंत्री और अलग ध्वज की व्यवस्था की गई। प्रजा परिषद, जो जम्मू में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत थी, उसने इसकी खिलाफत करते हए एक जोरदार आंदोलन किया और जिसका समर्थन भारतीय जनसंघ ने भी किया। संसद में डॉ. मुखर्जी ने इसके खिलाफ अपनी बात रखी। जम्मू-कश्मीर में आंदोलन तेज हो गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के महासचिव बने। दीनदयाल उपाध्याय ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रस्ताव को भू-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रूप में व्यक्त किया। यह पहला वैचारिक संकल्प था। राज्य पुनर्गठन आयोग की मांग की गई। मार्च 1953 में जम्मू और कश्मीर के पूर्ण एकीकरण की मांग के साथ दिल्ली में एक सत्याग्रह शुरू किया गया था। 11 मई को डॉ. मुखर्जी ने इस सत्याग्रह के तहत बिना परमिट के जम्मू कश्मीर में प्रवेश किया, उन्हें वहां गिरफ्तार कर लिया गया और श्रीनगर ले जाया गया। जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के लिए देश भर से लाखों सत्याग्रहियों ने इस आंदोलन में भाग लिया। 23 जून को डॉ. मुखर्जी शहादत को प्राप्त हए। परिणामस्वरूप, नौ अगस्त को शेख अब्दुल्ला को प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद गिरफ्तार किया जाना था। अंततः परमिट प्रणाली को भी समाप्त कर दिया गया। 1962 में 14 सांसद जनसंघ से चुने गए और वोट प्रतिशत 6.44 प्रतिशत पहंच गया। जनसंघ के इतिहास में वर्ष 1964 एक मील का पत्थर साबित हुआ। 10 से 15 अगस्त तक ग्वालियर में एक अध्ययन शिविर आयोजित किया गया था, जहाँ सिद्धांत और नीति के तौर एकात्म मानववाद की अवधारणा को अपनाया गया था। नवंबर 1964 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मसौदे को स्वीकार कर लिया और श्रीबाछ राज व्यास की अध्यक्षता में 23 से 26 जनवरी, 1965 तक विजयवाड़ामें आयोजित 12वें अखिल भारतीय सम्मेलन में इसे आधिकारिक रूप से पार्टी का दर्शन घोषित किया गया। दिसंबर 1964 में जनसंघ ने परमाणु बम बनाने की मांग की। जनसंघ ने सरकार और सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

जिलाध्यक्ष अरोरा ने कहा कि त्याग और संघर्षों की बदौलत आज भारतीय जनता पार्टी वट वृक्ष का रूप ले चुकी है। कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर आज भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी है। हमारा लक्ष्य अब आगामी पचास सालों तक सत्ता में बने रहने का है। इसके लिए सभी को पार्टी के मूल सिद्धातों पर चलकर काम करना होगा।

द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता जिला महामंत्री विवेक सक्सेना ने भाजपा का इतिहास एवं विकास के बारे में विषय पर कार्यकर्ताओं को विस्तार से जानकारी देते हुए उनका मनोबल बढ़ाया और पार्टी के लिए तन मन धन से समर्पित होकर काम करने का आहवान किया।
कार्यशाला में गजेंद्र सिंह, चंद्रसेन कोली, ललित मिगलानी, राजीव चौधरी, सुनील यादव, फरजाना बेगम, राज कोहली, ललित बिष्ट, संजीव शर्मा, पिंटू पाल राजकुमार कोहली, धर्मेंद्र आर्य, परमिंदर सिंह, गौरव शर्मा, रोहित मित्तल, धर्मपाल कोली, रजनी रावत, भगवान देवी, हरजीत सिंह, प्रेमपाल गंगवार आदि सहित तमाम भाजपाई मौजूद थे।

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