भाई ने दिया साथ तो बहन राष्‍ट्रीय स्‍तर पर झटक लाई गोल्‍ड मेडल 

बरेली (Bareilly) के इज्जत नगर की रेनू बोरा को खेलों में कोई रुचि (Interest) नहीं थी। एक दिन उनके भाई संतोष सिंह बोरा ने कहा कि तुम दौड़ती बहुत तेज हो, स्कूल की प्रतियोगिताओं में भाग लिया करो। भाई ने दौड़ने के लिए प्रोत्साहित किया तो रेनू ने स्कूल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। इसके बाद स्कूल से शुरू हुआ यह सफर राष्‍ट्रीय स्‍तर तक पहुंच गया। रेनू ने अब तक 5 गोल्ड मेडल (Gold Medal) समेत 7 पदक जीते हैं।

जिला स्तर (District Level) पर जीतने के बाद रेनू के कदम प्रदेश स्तर (State Level) तक पहुंच गए। इसके लिए उन्होंने बहुत ही कठिन परिश्रम किया। उनकी कड़ी मेहनत और जज्बा इतना पक्‍का था कि वह प्रदेश स्तर पर पहले ही प्रयास में 800 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। इसके बाद प्रदेश स्तर पर ही 10 मीटर की मैराथन दौड़ में गोल्ड जीतकर यह बता दिया कि वह और भी बेहतर कर सकती हैं। प्रदेश स्तर पर होने वाली क्रास कंट्री रेस में रेनू ने दो गोल्ड, 2 सिल्वर और दो कांस्य पदक जीते है।
रेनू में नेशनल लेवल पर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी रेस (All India University Race) में 10,000 से अधिक प्रतिभागियों में टॉप-10 में जगह बनाते हुए सातवां स्थान पर आयी थी। इसके बाद इंजरी के कारण कुछ समय के लिए वह खेल से हट गई लेकिन बाद में उन्होंने फिर अभ्यास किया और इसे ही अपना करियर बना लिया। रेनू आज शहर के कॉलेज में खेल में स्टूडेंट को प्रशिक्षित करती हैं।
रेनू बोरा कहती हैं कि उनके पिता रेलवे में काम करते हैं। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट तो नहीं था लेकिन साथ में अभ्‍यास करने वाले खिलाड़ियों को देखा तो उनमे अधिकतर लोग बहुत गरीब परिवार से थे। पर उनमें एक चाहत थी कि वे देश के लिए पदक जीते। जुनून और हौसले की कमी नहीं थी लेकिन आर्थिक समस्याओं की बेड़ियां उनके पैरों में पड़ी थी इसलिए उनकी प्रेक्टिस बंद हो गई। आज भी उनके पास डाइट का पैसा नहीं है ऐसे में वे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।सरकार को खिलाड़ियों के डाइट की व्‍यवस्‍था तो करनी ही चाहिए।

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