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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- पोत परिवहन मंत्रालय का बदला जाएगा नाम, पीएम ने और क्या – क्या कहा जानिए इस खबर में विस्तार से…

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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि पोत परिवहन मंत्रालय का विस्तार किया जा रहा है और इसका नाम बदलकर पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय रखा जाएगा। वह हजीरा से घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। भावनगर स्थित घोघा और सूरत स्थित हजीरा के बीच सड़क मार्ग से 375 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता था लेकिन इस सेवा के शुरू होने से समुद्री मार्ग से अब यह घटकर 90 किलोमीटर रह जाएगा। दोनों स्थानों के बीच यात्रा करने में जहां 10 से 12 घंटे लगते थे, फेरी सेवा शुरू होने के बाद लगभग चार घंटे ही लगेंगे। मोदी ने कहा कि देश के समुद्री क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अंग बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार के प्रयासों को गति देने के लिए अब एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब पोत परिवहन मंत्रालय का नाम बदलकर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय रखा जाएगा।” उन्होंने कहा, “इसका (मंत्रालय) विस्तार किया जा रहा है। अधिकांश स्थानों पर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पोत परिवहन मंत्रालय पत्तन और जलमार्ग का कार्य भी संभालते हैं। नाम में स्पष्टता होने से काम में भी स्पष्टता आएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि रविवार को शुरू हुई नई रो-पैक्स सेवा से भावनगर और सूरत के बीच दूरी कम होगी। उन्होंने कहा कि पहले जहां 10 से 12 घंटे लगते थे, वहीं अब यह यात्रा चार घंटे में पूरी की जा सकेगी। मोदी ने कहा, “इस सेवा से लोगों के समय और खर्च दोनों की बचत होगी और सड़कों पर यातायात कम होगा, जिससे प्रदूषण कम होगा।”

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि ‘वोयाज सिम्फनी’ नामक तीन डेक वाला रो-पैक्स फेरी पोत सूरत जिले के हजीरा और भावनगर के घोघा के बीच चलेगा और इसकी क्षमता 30 ट्रक, सौ कार और 500 यात्रियों के अलावा नौवहन दल के 34 सदस्यों को ले जाने की है। विज्ञप्ति के अनुसार, फेरी प्रतिदिन तीन ट्रिप करेगी और साल भर में पांच लाख यात्रियों को लाने ले जाने का काम करेगी। इसके अलावा, यह साल भर में 80,000 यात्री वाहन, 50,000 दोपहिया वाहन और 30,000 ट्रक ढोएगी। मोदी ने कहा कि ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को मजबूत करने के लिए समुद्र के रास्ते परिवहन को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की अपेक्षा, एक स्थान से दूसरे स्थान तक सामान ले जाने का खर्च भारत में ज्यादा है और जलमार्ग से होने वाले परिवहन के जरिये इस खर्च को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

मोदी ने कहा, “इसलिए हमारा ध्यान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित है जिससे निर्बाध रूप से सामान की ढुलाई सुनिश्चित की जा सके। बेहतर सामुद्रिक लॉजिस्टिक्स के लिए के साथ बेहतर अवसंरचना के लिए आज हम सिंगल विंडो व्यवस्था पर कार्य कर रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “लॉजिस्टिक्स के खर्च को कम करने के लिए देश बहुआयामी संपर्क व्यवस्था स्थापित करने के वास्ते एक समग्र और दूरगामी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि सड़क, रेल, वायु और पोत परिवहन अवसंरचना के बीच खामियों को दूर कर संपर्क में सुधार किया जाए।” उन्होंने कहा कि भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी ‘मल्टी मोडल’ पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “इन सभी प्रयासों से हम लॉजिस्टिक्स के खर्च को कम कर सकेंगे। यह प्रयास अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में जलमार्ग के संसाधन और विशेषज्ञता हमेशा से थी लेकिन पिछली सरकारों के पास इनका इस्तेमाल करने की दृष्टि नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि जलमार्ग से परिवहन, सड़क और रेल की अपेक्षा अधिक सस्ता है और इससे पर्यावरण पर बहुत कम प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा, “इसके बावजूद, 2014 के बाद ही इस दिशा में समग्र प्रयास किया गया। नदियां और समुद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले भी अस्तित्व में थे। जो अस्तित्व में नहीं था, वह थी दृष्टि जिसे देश ने 2014 के बाद अनुभव किया।” मोदी ने कहा कि ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को मजबूत करने के लिए उनकी सरकार ने मछुआरों पर भी ध्यान दिया है और मत्स्यपालन अवसंरचना में सुधार के लिए 30,000 करोड़ रुपये की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ की शुरुआत की है।

उन्होंने कहा, “आज देशभर के तटीय क्षेत्रों में पत्तन क्षमता में वृद्धि की जा रही है और नए बंदरगाह का निर्माण हो रहा है। इस दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं कि देश के विकास के लिए 21,000 किलोमीटर जलमार्ग का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।” प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए ‘सागरमाला’ के तहत 500 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इनमें से लाखों करोड़ों रुपये की कई परियोजनाएं तैयार हो चुकी हैं। मोदी ने कहा कि पिछले साल समुद्री मार्ग के जरिये होने वाले देश के पूरे व्यापार में गुजरात की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों के लिए अवसंरचना और क्षमता के विकास का काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मेरीटाइम क्लस्टर’ और सामुद्रिक विज्ञान के लिए विश्वविद्यालय तथा भावनगर में विश्व के पहले सीएनजी टर्मिनल के निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीनगर में गुजरात अंतरराष्ट्रीय वित्त टेक-सिटी (जीआईएफटी) में गुजरात मेरीटाइम क्लस्टर बनाया जा रहा है जो बंदरगाहों और समुद्र-मार्ग के लिए समर्पित व्यवस्था होगी। मोदी ने कहा, “इससे इस क्षेत्र में वृद्धि होगी।” उन्होंने कहा कि गुजरात के दाहेज में भारत के पहले रासायनिक और एलएनजी टर्मिनल का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि भावनगर में एक रो-रो टर्मिनल, तरल कार्गो टर्मिनल और एक कंटेनर टर्मिनल स्थापित किया जा रहा है। मोदी ने कहा, “नए टर्मिनल से भावनगर बंदरगाह की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार घोघा से दाहेज के बीच 2017 में शुरू की गई फेरी सेवा पुनः चालू करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “इस परियोजना के सामने प्रकृति से संबंधित कई चुनौतियां सामने आईं। आधुनिक तकनीक की सहायता से उन्हें हटाया जा रहा है और मुझे उम्मीद है कि घोघा और दाहेज के लोग जल्दी ही इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे।” मोदी ने किसानों, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों से भी बातचीत की जिन्होंने फेरी सेवा शुरू होने पर खुशी जताई। इस अवसर पर पोत परिवहन मंत्री मनसुख मंडाविया और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी मौजूद थे।

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