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देहरादून- फ़िल्म विकास बोर्ड ने बदली अपनी फ़िल्म नीति, अब स्थानीय फ़िल्म निर्माताओं को सरकार देगी ऐसी नई सुविधाएं

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सचिव सूचना दिलीप जावलकर ने बताया है कि राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2015 में संशोधन करते हुए उत्तराखण्ड फिल्म (संशोधन) नीति-2019 जारी कर दी गई है। सचिव सूचना ने बताया कि राज्य में फिल्म निर्माता/निर्देशक को शूटिंग के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से फिल्म नीति में संशोधन किये गये है। फिल्म नीति में संशोधन होने से अब फिल्म निर्माता/निर्देशकों को अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने बताया कि फिल्म नीति के अनुसार अब उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय फिल्मों का संेसर सर्टिफिकेट प्राप्त होने के बाद उत्तराखण्ड के सिनेमागृहों व मल्टीप्लेक्स स्वामियों द्वारा क्षेत्रीय भाषा की फिल्म को प्रतिदिन, एक सप्ताह तक अनिवार्य रूप से दिखाया जाना आवश्यक होगा। उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों पर फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहित करने हेतु आवश्यक अनुमति की औपचारिकताओं को सिंगल विण्डो सिस्टम के माध्यम से सुगम बनाया जायेगा। सिंगल विंडो सिस्टम में आॅनलाइन आवेदन भी स्वीकार किये जायेंगे। जिसमें सभी संबंधित विभाग आॅन लाइन संस्तुति सूचना विभाग को एक सप्ताह में प्रेषित करेंगे। इसके बाद सूचना विभाग द्वारा आॅन लाइन अनुमति भी प्रदान की जायेगी। उत्तराखण्ड में शूटिंग होने वाली फिल्मों के लिये शूटिंग शुल्क नहीं लिया जायेगा।

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सिंगल विंडो सिस्टम के अतिरिक्त राज्य सरकार के विभागों द्वारा शूटिंग हेतु कोई अन्य शुल्क नही लिया जायेगा, वन विभाग द्वारा पूर्व में निर्धारित शूटिंग शुल्क को पूर्णतयाः समाप्त समझा जायेगा। वन विभाग उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद द्वारा निर्गत अनुमति पत्र के आधार पर संबंधित फिल्म निर्माता -निर्देशक से शूटिंग हेतु किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नही लिया जायेगा, परन्तु शूटिंग स्थल पर यदि पूर्व से ही कोई प्रवेश शुल्क या पार्किग शुल्क, निर्धारित हो, तो फिल्म निर्माता द्वारा उसका वहन संबंधित विभाग को किया जायेगा। उत्तराखण्ड राज्य से बाहर, मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, दिल्ली जहां पर भी पर्यटन विकास परिषद के जनसंपर्क अधिकारी तैनात है, उन्हें फिल्म निर्माता-निर्देशकों से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया जायेगा। फिल्मों की शूटिंग अवधि में पुलिस विभाग के संबंधित जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा अनिवार्य रूप से कम से कम 5 पुलिस कर्मी फिल्म निर्माता के अनुरोध पर शूटिंग अवधि तक निःशुल्क उपलब्ध कराये जायेंगे। इससे अधिक संख्या में पुलिस कर्मी पुलिस विभाग द्वारा निर्धारित शुल्क के आधार पर उपलब्ध कराये जा सकते है।

फिल्म नीति में फिल्मों को अनुदान दिये जाने के संबंध में भी संशोधन किया गया है, जिसके अनुसार फिल्म निर्माण लागत का 30 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये ही दिया जायेगा। पूर्व में 2 करोड़ रुपये तक की फिल्म को ही फिल्म निर्माण लागत वाले निर्माता/निर्देशक द्वारा ही अनुदान किये जाने का प्राविधान था, जिसे समाप्त कर दिया गया है। अब राज्य में 75 प्रतिशत शूटिंग करने वाले सभी फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुदान हेतु प्रस्ताव जमा करा सकेंगे। । प्रदेश में क्षेत्रीय फिल्म प्रमाणीकरण परिषद का गठन किया जायेगा, इससे उत्तराखण्ड में निर्मित फिल्में विशेष रूप से क्षेत्रीय भाषाओं में निर्मित फिल्मों के लिए प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। प्रमाणीकरण के पश्चात क्षेत्रीय भाषाओं में निर्मित फिल्मों को उत्तराखण्ड माल एवं सेवा कर (ैळैज्) अधिनियम 2017 के लागू होने की तिथि (01 जुलाई, 2017) स जमा किये गये ैळैज् का 30 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जायेगी। परिषद में कुल 18 सदस्य होंगे, जिनमें से 01 अध्यक्ष, 01 वरिष्ठ उपाध्यक्ष, 01 उपाध्यक्ष एवं 07 गैर सरकारी सदस्य होंगे, जबकि 8 सरकारी सदस्य नामित होंगे।