दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा- चीनी मांझा पर प्रतिबंध लगाने वाले एनजीटी के आदेश पर क्या कदम उठाए गए?

नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से कहा कि वह अदालत को यह सूचित करे कि उसने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए हैं, जिसमें पतंगबाजी में चीनी मांझा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा- चीनी मांझा पर प्रतिबंध लगाने वाले एनजीटी के आदेश पर क्या कदम उठाए गए? नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से कहा कि वह अदालत को यह सूचित करे कि उसने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए हैं, जिसमें पतंगबाजी में चीनी मांझा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद के साथ मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चीनी मांझा (पतंग की डोरी) के कथित इस्तेमाल पर सुरक्षा चिंता व्यक्त की गई है और पतंगबाजी और संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई है।

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दिल्ली पुलिस ने अदालत को अवगत कराया कि इस संबंध में हर साल आदेश पारित किए गए हैं और मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने की मांग की।

जवाब में पीठ ने कहा, आप हमें बताएं कि एनजीटी द्वारा पारित आदेश को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।

2017 में, एनजीटी ने नायलॉन या किसी भी सिंथेटिक मांझा या धागे के निर्माण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जो प्रकृति में घातक और गैर-बायोडिग्रेडेबल के समान होते हैं।

चीनी मांझा के इस्तेमाल पर सुरक्षा चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई थी, जिसमें पतंगबाजी और संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

अधिवक्ता संसार पाल सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में पतंगबाजी से इंसानों और पक्षियों का जीवन और सुरक्षा खतरे में है। याचिका में पतंगों के उड़ने, बनाने, बेचने-खरीदने, भंडारण और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा गया है कि यह एकमात्र समाधान है, क्योंकि मांझे से हादसा होने पर दोषियों को पकड़ना मुश्किल होता है।

याचिका के अनुसार, ऐसी घटनाएं होने पर कुछ मामलों में तो पतंग के मांझे से दुर्घटना होने पर आरोपी के बारे में पता लगना या उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए उसे पकड़ना कुल मिलाकर असंभव रहता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि पतंगबाजी की गतिविधि के दौरान प्रतियोगी एक-दूसरे की पतंग की डोरी काटने में लगे रहते हैं।

वकील की ओर से दलील दी गई है कि अक्सर देखा जाता है कि पतंगबाज चाहता है कि कांच या धातु की परत वाले मांझे का इस्तेमाल करे, जो कि काफी खतरनाक है।

याचिका के अनुसार, स्ट्रिंग को तोड़ना कठिन बनाने के लिए, उन्हें एक मजबूत स्ट्रिंग की आवश्यकता होती है, जिसे लोकप्रिय रूप से चीनी मांझा के रूप में जाना जाता है, जिसमें निर्माता एक कांच का लेप लगाते हैं, जो कई बार मनुष्यों और पक्षियों को चोट पहुंचाता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 94 के अनुसार पतंगबाजी की गतिविधि पहले से ही प्रतिबंधित है, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति पतंग या ऐसी कोई अन्य चीज नहीं उड़ाएगा, जिससे व्यक्तियों, जानवरों/पक्षियों या संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है।

याचिकाकर्ता ने इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए चीनी मांझा के कारण हुई घातक दुर्घटनाओं का भी हवाला दिया है।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम