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खुशखबरी, आवास विकास ने यूपी में  कम कर फ्लैटों की कीमत

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लखनऊ: आवास विकास परिषद  (Avas Vikas Parishad) ने अपनी लखनऊ की 10 योजनाओं के करीब 4000 फ्लैटों की कीमतें पांच से 10 प्रतिशत कम कर दी हैं। परिषद ने अपने 31 कम्यूनिटी सेन्टर को संचालन के लिए निजी हाथों में देने का फैसला किया है। परिषद ने एक वर्ष के लिए प्रदेश भर की योजनाओं में जमीन व फ्लैट की कीमतें बढ़ाने पर रोक लगा दी है ।
avas vikas parishad
प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई परिषद की बोर्ड बैठक कुल 76 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसमें से नौ मामले स्थगित कर दिए गए। बाकी को बोर्ड ने मंजूरी दे दी। आवास आयुक्त अजय चौहान व सचिव विशाल भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड ने परिषद की अवध विहार, वृन्दावन तथा आम्रपाली योजना में फ्लैटों की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी की मंजूरी दी है।

अवध विहार योजना के मंदाकिनी, अलकनन्दा, भागीरथी, गंगोत्री तथा नन्दिनी एन्क्लेव में पांच प्रतिशत की छूट देने का फैसला हुआ है। वृन्दावन योजना के आकाश, अरावली, गोवर्धन व नीलगिरी एन्क्लेव में पांच प्रतिशत तथा एवरेस्ट एन्क्लेव में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

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आम्रपाली योजना में एक व दो बेडरूम के फ्लैटों में भी 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। करीब पांच दिनों के भीतर योजना लांच हो जाएगी। इन्हें बेचने के लिए आवास विकास परिषद बैंकों के सहयोग से मार्च में लोन मेला भी लगाएगा। मेले में आवास विकास के भी सभी फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। यहां इन्हें ग्राहकों को दिखाने की भी व्यवस्था रहेगी।

नोएडा व ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर अवैध निर्माण रोकेंगे
आवास विकास भविष्य में नोएडा व ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर अवैध निर्माण रोकेगा। जिस तरह ग्रेटर नोएडा में बिना अथारिटी की अनुमति के कोई विभाग बिल्डिंग के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता है उसी तरह आवास विकास भी शासन को प्रस्ताव भेजेगा और उससे अधिकार मांगेगा।

कांशीराम योजना के मकानों को बेचने की मंजूरी मिली
आवास विकास ने वर्ष 2007 में लांच अपनी कांशीराम आवास योजना के मकानों को बेचने की मंजूरी भी दे दी है। अभी तक इसे बेचने की अनुमति नहीं थी।

एलडीए की तर्ज पर निजी हाथों में सौंपे जाएंगे कम्‍युनिटी सेंटर
एलडीए की तर्ज पर आवास विकास परिषद भी अपने सभी कम्युनिटी सेन्टर निजी हाथों में देने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने इसकी भी मंजूरी दे दी है। इन्हें तीन साल की लीज पर दिया जाएगा।

वाराणसी व गाजियाबाद की योजनाओं का विवाद सुलझा
आवास विकास की बोर्ड ने बैठक में सोमवार को परिषद की कई पुरानी योजनाओं का विवाद खत्म करने पर भी निर्णय हुआ।  करीब 20 वर्षों से विवादित गाजियाबाद की अजन्तापुरम योजना का भी हल निकाल लिया गया। इस योजना में 12 सहकारी समितियां थीं जिन्होंने आवास विकास को अपनी जमीन देने का प्रस्ताव दिया था।

इनके पास 230 एकड़ जमीन थी। योजना कुल 335 एकड़ में विकसित होनी है। बोर्ड से इसकी मंजूरी हो गयी। अब इसे शासन भेजा जाएगा। इसी तरह वाराणसी की पाण्डेयपुर योजना का विवाद भी सुलझा दिया गया। इस योजना में 30-35 किसान से विवाद चल रहा था। आवास विकास अब यहां के किसानों को 50 प्रतिशत जमीन देगा और 50 प्रतिशत जमीन खुद लेगा।

बलरामपुर के बहराइच मार्ग योजना का रास्ता भी खुल गया। इस योजना के लिए किसानों से लैण्डपूलिक स्कीम के तहत जमीन ली जाएगी। कानपुर मंधना योजना के विकास का प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया। यहां एक फ्लाईओवर बनाया जाना है। उसकी मंजूरी होने के बाद आवास विकास परिषद इस पर निर्णय लेगा।

अवध विहार योजना में फ्लाईओवर के निर्माण का रास्ता साफ
अवध विहार योजना में सेंवई के पास रेलवे लाइन पर काफी समय से अधूरे रेलवे ओवर ब्रिज के बनाने का रास्ता भी साफ हो गया।  बीच में कुछ किसानों का निर्माण आ गया था जिसकी वजह से आरओबी का निर्माण रुक गया था। इन किसानों को दूसरी जगह जमीन दी जानी थी। बोर्ड ने किसानों को दूसरी जगह जमीन देने की मंजूरी दे दी। जिससे आरओबी के निर्माण की सभी अड़चनें खत्म हो गयीं। यह आरओबी निलमथा नगराम रोड पर बनाया जा रहा था। इसके बनने से नगराम की तरफ आना जाना आसान हो जाएगा।

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