एनसीईआरटी का अध्ययन, तमिलनाडु कक्षा 3 के छात्र गणित में सबसे ज्यादा कमजोर

चेन्नई, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि तमिलनाडु के स्कूलों में कक्षा 3 के छात्र संख्यात्मक क्षमता परीक्षण में बेहद खराब हैं। छात्रों ने तमिल, अंग्रेजी भाषा में भी खराब प्रदर्शन किया।
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एनसीईआरटी का अध्ययन, तमिलनाडु कक्षा 3 के छात्र गणित में सबसे ज्यादा कमजोर चेन्नई, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि तमिलनाडु के स्कूलों में कक्षा 3 के छात्र संख्यात्मक क्षमता परीक्षण में बेहद खराब हैं। छात्रों ने तमिल, अंग्रेजी भाषा में भी खराब प्रदर्शन किया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत निपुण भारत योजना के लिए एनसीईआरटी द्वारा फाउंडेशनल लनिर्ंग स्टडी, 2022 का आयोजन किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि तमिलनाडु के कक्षा 3 के 29 प्रतिशत छात्र संख्या की पहचान, गुणा, भाग, संख्याओं और आकृतियों वाले पैटर्न की पहचान करने और कैलेंडर में तारीखों और महीनों की पहचान समेत बुनियादी संख्यात्मक क्षमताओं को पूरा नहीं कर सके। यह राज्य को कक्षा 3 के छात्रों की संख्यात्मक क्षमता के मामले में सबसे पिछड़ा बनाता है।

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तमिलनाडु के बाद जम्मू और कश्मीर (28 प्रतिशत), असम (18 प्रतिशत), गुजरात (18 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ (18 प्रतिशत) का स्थान है। संख्यात्मक रूप से नहीं समझ सकने वाले छात्रों की संख्या का राष्ट्रीय औसत केवल 11 प्रतिशत था। दिलचस्प बात यह है कि, राष्ट्रीय स्तर पर सकल नामांकन अनुपात केवल 27.1 है जबकि तमिलनाडु का 51.4 है। इस आंकड़े से साफ पता चलता है कि तमिलनाडु इसमें दूसरे राज्यों से पिछड़ रहा है।

राज्य ने भाषा श्रेणी में भी खराब प्रदर्शन किया, साथ ही 48 प्रतिशत छात्रों को तमिल में बुनियादी ज्ञान और कौशल नहीं पता था, जबकि 43 प्रतिशत अंग्रेजी नहीं जानते थे। परीक्षा का आयोजन बच्चों की पढ़ाई में जोर देने के लिए किया गया और उन पाठों से प्रश्न पूछे गए जो स्कूल के पाठ्यक्रम में नहीं थे।

यह अध्ययन 336 स्कूलों के 2,937 कक्षा 3 के छात्रों के बीच किया गया था। यह अध्ययन सरकारी स्कूलों, निजी स्कूलों और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों के बीच किया गया था। एनसीईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल 46 फीसदी छात्र ही तमिल में 80-100 नंबरों को सही से पढ़ने में सक्षम थे। केवल 47 प्रतिशत छात्र ही अंग्रेजी के 80 प्रतिशत शब्दों को अच्छे से पढ़ सकते थे।

--आईएएनएस

केसी/एएनएम